फिर कोरोना होने लगा खतरनाक, संक्रमितों की संख्या बढऩे लगी

लोग होने लगे लापरवाह
सरकारी रिकार्ड ६६१६, हकीकत में ८६६१ हो चुके संक्रमित

By: Suresh Jain

Published: 20 Nov 2020, 08:51 AM IST

भीलवाड़ा।
एक माह के अन्तराल के बाद वापिस कोरोना खतरनाक होने लगा है। पिछले कुछ दिनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी आई है। लोग लापरवाह तो जिम्मेदार बेपरवाह होते जा रहे है। गत मार्च में जब भीलवाड़ा शहर में पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज आया तो पूरे प्रदेश में हड़कम्प मच गया था। पूरे शहर में कफ्र्यू लगा दिया गया। आनन-फानन में जांच से लेकर अस्पतालों में वेंटिलेटर तक की व्यवस्था कराई। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जब संक्रमितों की संख्या बढऩे लगी तो व्यवस्थाएं खुद ही संक्रमित हो गई। इन दिनों हालात यह है कि पॉजिटिव आने पर न ट्रेसिंग की जा रही है और न ही आसपास रहने वाले लोगों की जांच की कोई सुविधा है।
दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में कोरोना की दूसरी लहर की तरह जिले में भी कोरोना संक्रमण की हालत फिर से बिगडऩे लगी है। यूं तो जिले में हर दिन 100 से कम संक्रमित की रिपोर्ट सरकार की ओर से जारी की जा रही है, लेकिन हकीकत है कि अब कोरोना की जांच भी नाम मात्र की रह गई है। लोग खुद ही बचाव के लिए जांच केन्द्रों पर जाकर अपने सेम्पल देकर आ रहे है। यही कारण है कि जब ज्यादा सेंपल की जरूरत है, तब जांच की संख्या भी पहले की तुलना में काफी कम रह गई है।
पहले टीम खुद जाकर करती थी जांच
कोरोनाकाल की शुरुआत में टीम खुद रेण्डम सेंपल लेकर जांच करती थी। गली- मोहल्लों में शिविर लगाकर जांच कर संक्रमण के फैलाव का पता लगाया जाता था, लेकिन इन दिनों ज्यादातर जांच की व्यवस्थाएं ठप हो चुकी हैं।
पोस्टर से कर रहे बचाव
कोरोना संक्रमण की शुरुआत में पॉजिटिव आने पर पहले दो किलोमीटर, फिर एक किलोमीटर के दायरे में कफ्र्यू लगाकर लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया जाता था। संक्रमित के आसपास के क्षेत्र को हाइ रिस्क जोन घोषित कर लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी जाती थी, लेकिन अब पॉजिटिव आने पर केवल संक्रमित के घर के बाहर एक पोस्टर लगाया जाता है, उसे भी लगाने के बाद कोई देखने तक नहीं आता। यहां तक कि कोरोना पॉजिटिव घर में हैं या बाहर घूम रहे। इसका पता लगाने की कोशिश भी दिखाई नहीं पड़ती। ट्रेसिंग के नाम पर केवल एक बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी संक्रमित को दवा देकर जाता है, उसके बाद वह नेगेटिव हुआ या नहीं, इसकी चिंता कोई नहीं करता। पहले कोरोना संक्रमित आने पर न केवल उसके परिजनों के सेंपल लेकर जांच कराती थी, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के सेंपल की जांच होती थी। वह अब सब बन्द हो गया है। कोरोना संक्रमण की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स का गठन, आरआरटी का गठन, समेत अन्य टीमे थी। लेकिन अब सब बन्द हो गई है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार जिले में संक्रमितों की संख्या ६६१६ और मौतें ३० है। जबकि जिले में ८६६१ कोरोना संक्रमित निकल चुके है तथा १६२ लोगों की मौत हो चुकी है। यही कारण है कि इन दिनों जिले में कोरोना संक्रमण का फैलाव किस स्तर पर है और कोरोना की लहर की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा प्रशासन को भी नहीं है।

Suresh Jain Reporting
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