गो वंश को भी चाहिए आधार कार्ड

cow dynasty also need aadhar card केन्द्र सरकार के गोवंश संरक्षण एवं गो वंश को नाम देने का नायाब तरीका टैग (यूनिक कोड) कोरोना संकट काल में उलझ कर फाइलों में खो गया है। दूसरी तरफ टैग नहीं लगने से गो वंश का आधार कार्ड भी नहीं बन सका है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 14 Oct 2021, 11:29 AM IST

भीलवाड़ा। केन्द्र सरकार के गोवंश संरक्षण एवं गो वंश को नाम देने का नायाब तरीका टैग (यूनिक कोड) कोरोना संकट काल में उलझ कर फाइलों में खो गया है। प्रदेश की अनदेखी से मवेशियों की उनकी पहचान नहीं मिलने से पालतु गो वंश भी आवारा टोलियों में शामिल होता जा रहा है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, वही गो वंश भी सड़क पर सुरक्षित नहीं रहा है। दूसरी तरफ टैग नहीं लगने से गो वंश का आधार कार्ड भी नहीं बन सका है।

केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत राज्य सरकार ने एनपीबीबी तथा एनएमबीपी (पशु संजीवनी) के जरिए गोवंश तथा भैंसवंश के प्रजनन योग्य एवं दुधारू पशुओं में 12 अंकों के टैग लगाए जाने की योजना वर्ष २०१९ में हाथ में ली थी। योजना की क्रियांवति के पीछे केन्द्र की मंशा गो वंश संरक्षण करना, गायों को कत्लखानों व चोरी से बचाना तथा पशु पालकों को पाबंद करना था।

टैग नहीं गो वंश का आधार कार्ड
बारह नम्बरों वाले इस टैग से गोवंश की पहचान हो सकेगी। यह टैग एक मायने में गो वंश का आधार कार्ड है। टैग लगाने के बाद इस प्रकार के पशुओं की जानकारी कम्प्यूटर में फीड की जाएगी। इससे कोई भी व्यक्ति किसी भी गाय की स्थिति का पता लगा सकेगा कि यह गाय या भैंस कितनी उम्र की है और कितनी बार ब्याही हुई है। साथ ही ये यूनिक नम्बर होने के कारण इन नम्बरों का पशु कहीं और नहीं मिल पाएगा। ऐसे में किसी की गाय या भैंस खो गई है या चोरी हो गई तो भी नम्बरों के आधार पर आसानी से पता लगाया जा सकेगा।

जिले में १३ लाख गो वंश
जिले में करीब १३ लाख गोवंश है, जिले में वर्ष 2019 में टैग लगना शुरू हुए थे, लेकिन मार्च 2020 में प्रदेश में कोरोना की दस्तक के बाद यह टैग लगने का कार्य बंद हो गया, जो कि अभी तक शुरू नहीं हो सका है। जिले में 12091 गाय व 9781 भैस यानि कुल 21 हजार 87 गो वंश के ही अभी तक टैग लगे है। जबकि प्रदेश में करीब 68 लाख से अधिक दुधारू पशुओं में टैग लगाए जाना प्रस्तावित है।

पशु पालक नहीं लेते सुध
गो सेवक किशोर लखवानी बताते है कि गो वंश का टैग लगना जरूरी है, शहर एवं जिले में आए दिन गो वंश आवारा कुत्तों व सड़क हादसों का शिकार हो रहे है। उनकी मालिकों की पहचान नहीं होने से उनका व्यवस्थित उपचार समय पर नहीं हो पाता है, ऐसे में गो सेवक ही उनकी रक्षा एवं सेवा कर जान बचा रहे है।

टैग लगने से दूध नहीं उतरता
पशु पालक रामजस जाट बताते है कि ट्रैग लगाने की स्थिति में दुधारू या गर्भधारित गो वंश अपनी क्षमता के अनुरूप दूध नहीं देता है, वही कई अन्य बीमारियों की आशंका भी बनी रहती है। समाज सेवी राकेश मानसिंगका का कहना है कि गो संरक्षण के लिए शहर में संस्थाएं काम कर रही है, लेकिन उन्हें किसी प्रकार की सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है।

1063 जान जा चुकी है
जिले में एक दशक के आंकड़े बताते है कि गो वंश के अचानक सड़क पर आने से दर्जनों दुर्घटनाएं हुई है। स्टेट हाइवे व राज मार्ग पर वर्ष 2010 से मार्च 2021 तक 1063 लोगों की जान गई है जबकि घायलों की संख्या हजारों में है। भीलवाड़ा नगर परिषद के सभापति भगवती लाल बहेडिय़ा की कार भी गो वंश के सड़क आने से 29 अगस्त 2010 को दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, हादसे में उन्हें नहीं बचाया जा सका। इसी प्रकार मेडिकल कालेज के छात्र, सात पुलिस कर्मी की भी मवेशियों के सड़क पर आने से विभिन्न हादसों में मौत हुई है,

टैग लगे तो गो वंश रहे सुरक्षित
शहर में गो संरक्षण के लिए काइन हाउस है, लेकिन पशु पालक सहयोग नहीं कर रहे है। सार्वजनिक स्थलों से गो वंश को पकड़ कर लाने के दौरान कई पशु पालक नगर परिषद कर्मचारियों के साथ झगड़ा करते है और मवेशियों को छुड़ा ले जाते है। व्यवस्थार्थ पांच सौ रुपए जुर्माने का प्रावधान भी है, लेकिन अधिकांश जुर्माना तक नहीं भरते है। टैग लगने की स्थित गो वंश का संरक्षण हो सकेगा।
राकेश पाठक, सभापति, नगर परिषद

एफएमडी के साथ टैग प्रस्तावित
जिले में गो वंश के यूनिक कोड यानि ट्रैग लगाने का कार्य वर्ष 2019 में शुरू किया गया, लेकिन कोरोना संकट गहराने से जिले व प्रदेश में यह काम बंद है। सरकार के एफएमडी योजना यानि खुर पका व मुंह पका टीकाकरण के तहत अब यह टैग लगाए जाने की कार्य योजना है। टैग लगाने में पशु पालकों का सहयोग भी नहीं मिल रहा है। 21 हजार 872 गो वंश के लग चुके है टैग ।
प्रमोद पंचोली, संयुक्त निदेशक, पशु पालन विभाग, भीलवाड़ा

Narendra Kumar Verma Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned