भौतिकता के लिए साधना नहीं खो दें-आचार्य महाश्रमण

पर्युषण महापर्व जप दिवस के रुप में मनाया

By: Suresh Jain

Published: 10 Sep 2021, 10:03 AM IST

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में मंत्र पाठ, जप का महत्व रहा है। मंत्र जप के प्रकम्पन हमारी चेतना एवं वातावरण में शुद्धि का कार्य करते हैं। यहां तेरापंथ नगर में आचार्य के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के तहत गुरुवार को जप दिवस मनाया गया। जप दिवस पर आचार्य ने नमस्कार महामंत्र का जप भी करवाया गया।
भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा का आख्यान करते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान महावीर का जीव नयसार के भव के पश्चात 9वें ईशान देवलोक में उत्पन्न हुआ। वहां से फिर मनुष्य भव और फिर देवलोक इस प्रकार भ्रमण कर 18 वें भव में त्रिपिष्ठ वासुदेव के रूप में भगवान महावीर के जीव का जन्म ह*ुआ।
आचार्य ने कहा कि जो साधक संयम, शील धर्म का पालन करता है और फिर भौतिक सुखों के लिए उन्हें छोड़ देता है वह मानों करोड़ों रुपए में कोड़ी खरीदने जैसा है। जप दिवस पर यह ध्यान दें कि आत्म शुद्धि के लिए जप किया जाना चाहिए। जप आत्म निर्जरा का एक बहुत बड़ा साधन है।
इस अवसर पर मुनि महावीर कुमार, साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि मंत्र की शक्ति आत्म शक्ति का जागरण करके चेतना को ऊध्र्वमुखी बनाती है। कार्यक्रम में मुनि मार्दव कुमार, साध्वी विवेक ने भी विचार व्यक्त किए।
संवत्सरी महापर्व शनिवार को
आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में पर्युषण के आठवें दिन शनिवार को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। संवत्सरी जैन धर्म का वार्षिक पर्व है। इस दिन आत्मालोचन कर वर्ष भर में हुए दोषों का प्रायश्चित किया जाता है। तेरापंथ नगर में आचार्य के सान्निध्य में प्रात: 7 बजे से वर्चुअल कार्यक्रम होंगे।

Suresh Jain Reporting
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