वस्त्रनगरी में रोजगार 'अनलॉक, लगे हैं भर्ती चालू के बोर्ड

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी की रिपोर्ट
जिले के शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी दर शून्य, कपड़ा व खनन क्षेत्र में रौनक लौटी

By: Suresh Jain

Published: 22 Nov 2020, 12:41 PM IST

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
टेक्सटाइल सिटी अब कोरोना की मार से उबर रही है। अनलॉक के बाद सितम्बर-अक्टूबर में घरेलू मांग बढ़ी तो यहां टेक्सटाइल एवं माइनिंग उद्योग कुलांचे मारने लगा। कपड़ा व खनन उद्योग में काम ने इस कदर रफ्तार पकड़ी कि श्रमिकों की कमी पड़ गई। अभी इन दोनों क्षेत्रों में काम के इच्छुक कोई श्रमिक शायद ही बेरोजगार होगा। जानकारों की मानें तो इन क्षेत्रों में भीलवाड़ा में बेरोजगारी दर शून्य कही जा सकती है।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के हिसाब से भीलवाड़ा जिले के शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी दर शून्य फीसदी है। लॉकडाउन से पहले बेरोजगारी दर १० फीसदी थी। लॉकडाउन के बाद शहरों में बेरोजगारी ५० से ६० फीसदी तक बढ़ गई लेकिन अब भीलवाड़ा में हालात सामान्य होने लगे हैं। काम के लिए मजदूर नहीं मिल रहे है। दर्जनों टेक्सटाइल उद्योगों में भर्ती चालू होने के बोर्ड टंगे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा योजना के चलते कोरोना काल में प्रदेश में सर्वाधिक ४.३५ लाख लोगों को रोजगार भीलवाड़ा ने दिया। फिलहाल मनरेगा में मजदूरों की संख्या घट गई। मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अनुसार एग्रीकल्चर सेक्टर में अच्छी ग्रोथ से लोगों को रोजगार मिल रहा है।
एक लाख लोगों को रोजगार
जिले में मुख्य रूप से टेक्सटाइल में ६० हजार, माइनिंग इंडस्ट्री में १० हजार तथा माइनिंग सेक्टर में ३० हजार मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा डेढ़ लाख लोग इन सेक्टर से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर रोजगार पा रहे हैं। इनमें टेम्पो चालक, परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, चाय, होटल, ढाबा समेत अन्य व्यवसाय शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि में इस ३ मई को औसत बेरोजगारी दर 27.11 आंकी गई लेकिन जिले में यह दर 50-60 प्रतिशत हो गई थी।
जो गए, वे नहीं लौटे
जिले में टेक्सटाइल सेक्टर में करीब २५ हजार श्रमिक बिहार, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश के लोग हैं। इनमें १० हजार लोग स्थायी रूप से भीलवाड़ा में रहते हैं। शेष १५ हजार अपने गृह प्रदेश लौट गए। ट्रांसपोर्ट नगर में जम्मू-कश्मीर के तो निर्माण क्षेत्र में बड़ी संख्या में ओडिशा के मजदूर काम करते हैं, जो कोरोना अनलॉक के बाद भी लौटे नहीं हैं।
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अनलॉक के बाद मिलने लगे रोजगार
सितम्बर से नवंबर के ढाई माह का आंकलन करे तो टेक्सटाइल, माइनिंग इण्डस्ट्री तथा माइनिंग व निर्माण सेक्टर में लोगों की कमी महसूस होने लगी है। निर्माण कार्य में जाति विशेष की महिलाएं जुड़ी थी, लेकिन ओडिशा के मजदूरों के कारण रोजगार के अवसर घट गए थे। अब फिर से इन्हें रोजगार मिलने लगा है। युवाओं व ग्रामीण क्षेत्र में फसल बुवाई का काम चलने से उनकी मांग बढ़ी है। युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर में रोजगार मिलने लगा है।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चेम्बर

Suresh Jain Reporting
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