एनिकट ने घोंटा बांधों का गला

जिले में औसत ६४९ एमएम बारिश
गत वर्ष ९४ प्रतिशत हुई जिले में बारिश
६० बांध व तालाबों में आया मात्र १९ प्रतिशत पानी
३०० से अधिक बने एनिकट

By: Suresh Jain

Published: 01 Jul 2019, 12:45 PM IST

भीलवाड़ा।
जिले के हर गांव, ढाणी, मजरे व खेत में बारिश का पानी रोकने को बनाए एनिकट व फार्म पौण्ड के कारण जिले के ६० से अधिक बांध व तालाबों तक वर्षाजल नहीं पहुंच रहा है। इसके चलते सिंचाई के लिए हर साल दिए जाना पानी खेतों को नहीं मिल पा रहा है। असर फसल उत्पादन पर पड़ रहा है। जिले में दस साल की औसत बारिश ६४९ एमएम है। पिछले साल औसत की ९४ प्रतिशत बारिश होने के बावजूद सभी बांध व तालाब रीते रह गए थे। स्थिति ये है कि अच्छी बारिश के बाद भी बांधों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इसका परिणाम ये है कि लम्बे समय से जिले के दो दर्जन बांध रीते पड़े हैं। इनमें कई बांध ऐसे हैं जिनमें बारिश के दौरान एक फीट पानी भी नहीं पहुंचा। जहां पानी आया तो वह कुछ समय बाद सूख गए।
१२५ एनिकट केवल मेजा के रोड़े
शहर के सबसे बड़े मेजा बांध की क्षमता ३२ फीट से घटकर ३० फीट रह गई है। यह बांध २००६ के बाद नहीं भर पाया। माना जा रहा है कि इसकी राह में १२५ से अधिक एनिकट रोड़े बने हैं। इसके चलते लड़की बांध भी पूरी तरह से नहीं भर पा रहा है। लड़की बांध भरने के बाद ही मेजा में पानी आता है। जिले में३०० से अधिक एनिकट बने हंै।
प्री मानसून में ५८ एमएम बारिश
इस साल गर्मी ने मार्च से ही तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। जून के शुरू से 40 डिग्री से अधिक तापमान रहा। प्री मानसून ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वर्ष २०१८ में प्री मानसून में ५६ एमएम बारिश हुई थी, जबकि इस साल ५८ एमएम दर्ज की गई। जल संसाधन विभाग के अनुसार पिछले साल एक अक्टूबर तक ६१० एमएम बारिश हुई जो औसत से ९४ प्रतिशत थी। हालांकि बांधों में १९ प्रतिशत ही पानी आया था।
30 में से 2६ बांधों का हलक सूखा
सिंचाई विभाग के अधीन 30 में से 24 बांधों का हलक सूख चुका है। केवल आगूंचा टेंक, गोवटा डेम, मांडल डेम तथा पचानपुरा में ही कुछ पानी है। सभी बांध व तालाब पूरी तरह से सूख चुके है। जहां पानी है वहा पर अवैध रूप से खेती होने से खत्म होने के कगार पर है।

Suresh Jain Reporting
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