समवशरण में अष्टमंगल की स्थापना

भक्ति भाव से चल रहा विधान

By: Suresh Jain

Updated: 13 Oct 2021, 09:13 AM IST

भीलवाड़ा।
विद्यासागर वाटिका में आयोजित समवशरण विधान पूजन के तीसरे दिन मंगलवार को मान स्तम्भ से समवशरण में प्रवेश के बाद बनी हुई चैत्य, खातिका, लता, उपवन, ध्वज, कल्पतरु एवं भवनभूमि नामक सात भूमियों में बने हुए अनेकानेक जिन मंदिरों में विराजमान जिन प्रतिमाओं की पूजा कर अर्घ चढ़ाए गए। इनके आगे गोलाकार रुप में श्रीमण्डप भूमि में तीर्थंकर विराजमान होते है। श्रीमण्डप भूमि में ही स्थित जिन मंदिरों एवं मूर्तियों की पूजा कर श्रीफल चढ़ाए गए। सामान्य इन्द्र-इन्द्राणियों ने समवशरण में अष्टमंगल की स्थापना की।
इस दौरान निर्यापक मुनि विद्यासागर महाराज ने कहा कि हम सब मोह, अज्ञान एवं मिथ्यात्व रुपी अंधकारमय काल कोठरी की 84 लाख योनियों में भटक रहे है। पुण्य संयोग धर्म रुपी दीवार का सहारा मिला है, जिसे पकड़ कर मुक्ति रुपी द्वार की ओर आगे बढ रहे है। लेकिन पुन: पुन: मोह रुपी खुजली के कारण धर्म रूपी दीवार का सहारा छोडकर संसार में भटकने लग जाते है। आचार्यो ने कहा कि जो गया सो गया, आगे की ओर देखो। हमारा बीता जीवन टेस्ट मैच की पहली पारी के समान है जहां हम जीरो पर आउट हो गए। लेकिन मानव रुपी जीवन इस मैच की दूसरी पारी है जहां धर्म रुपी पुरुषार्थ कर मोक्ष रुपी सेंचुरी लगाने का प्रयास कर सकते है।
आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि विधान के दौरान प्रात: 6.30 बजे से अभिषेक क्रिया में विधिनायक आदिनाथ भगवान पर चीन प्रवासी नीरज सोनिका, अर्शिया, विरांश बाकलीवाल की ओर से शांतिधारा की गई। रुपेन्द्र गोधा, मुकेश अग्रवाल, जवरीलाल शाह ने अन्य प्रतिमाओं पर शांतिधारा की। सायंकालीन आरती का सौभाग्य ज्ञानचन्द विकास पाटनी ने प्राप्त किया। वैद प्रकाश, पंकज, सम्यक बडज़ात्या परिवार ने विद्यासागर महाराज ससंघ का पादपक्षालन किया। मीठालाल विनोद माण्डोत ने शास्त्र भेंट किए।

Suresh Jain Reporting
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