शिकारियों की खोलेगा वन विभाग हिस्ट्रीशीट

शातिर अपराधियों की फोटो एवं सूची जिस प्रकार पुलिस थानों में होती है, उसी भांति अब वन विभाग शिकारियों की सूची तैयार कर रहा है। शातिर शिकारियों की सूची अब वन मण्डल के कार्यालयों में लगेगी, वन्य जीवों की शिकार की घटना होने पर ऐसे शिकारियों की तलाश में डेरों में छापे भी पड़ेेंगे और धरपकड़ भी होगी। वन विभाग अब इसी कार्य योजना के तहत जिले में काम कर रहा है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 09 Jan 2021, 12:51 PM IST


भीलवाड़ा। शातिर अपराधियों की फोटो एवं सूची जिस प्रकार पुलिस थानों में होती है, उसी भांति अब वन विभाग शिकारियों की सूची तैयार कर रहा है। शातिर शिकारियों की सूची अब वन मण्डल के कार्यालयों में लगेगी, वन्य जीवों की शिकार की घटना होने पर ऐसे शिकारियों की तलाश में डेरों में छापे भी पड़ेेंगे और धरपकड़ भी होगी। वन विभाग अब इसी कार्य योजना के तहत जिले में काम कर रहा है।

वन क्षेत्र में वन्य जीवों पर शिकारियों के बढ़ते शिंकजे को देखते हुए वन विभाग ने शिकारियां पर ही शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है, इसके लिए जरायामपेशा लोगों के साथ ही शिकार में लिप्त परिवारों की सूची वन विभाग तैयार कर रहा है। इसके लिए वन विभाग की टीम आसपास के शिकारियों व उनके परिवारों के नामों को सूचीबृद्ध कर रही है। टीम यह भी जानकारी का समावेश कर रही कि कौन कौनसी जाति के लोग शिकार करते है, शिकार क्षेत्र कौनसा रहता है और किस प्रकार के वन्य जीव या पक्षी का शिकार करते है। शिकार के लिए किस प्रकार का जाल,दाना, चुगा, पंजा इस्तेमाल करते है, यह सब विभागीय रिकार्ड में अपडेट किया जा रहा है।
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सूनी खदानें, आबादी

कोरोना संकट काल में लोगों के घरों से बाहर कम निकलने और खदानों के सूनी होने से वन क्षेत्र से वन्य जीवों की हलचल आबादी क्षेत्र में बढ़ गई थी। इनमें पैथर के लिए करेड़ा, मांडलगढ़ क्षेत्र की सूनी खदानें सुरक्षित ठिकाने बन गई थी। इसी प्रकार खरगोश, सियार, मोर, चिंकारा, नीलगाय आदि वन्य जीव भी आबादी क्षेत्र में बेधडक नजर आने लगे थे। ऐसे में शिकारियों के जाल अब ज्यादा फैलने लगे है।
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पैंथर भी नहीं सुरक्षित

वन्य जीवों व पक्षियों के स्वछंद होने से शिकारियों का जाल भी वन क्षेत्र में फैलने लगा है। शिकार की घटनाएं बढऩे लगी है, शिकारी पैंथर को भी फंदा डाल कर मारने की कोशिश करने से नहीं चूक रहे है। करेड़ा क्षेत्र में छह माह में ऐसी दो घटना सामने आ चुकी है।
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सूचना पर नकद इनाम

वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत बताते है कि वन्यजीवों की रक्षा के लिए वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेन्टर ने भीलवाड़ा जिले मे वन्यजीवों के शिकार ओर वन्यजीवों की तस्करी की पुख्ता सुचना देने पर व्यक्ति को नकद ईनाम दने की घोषणा की है। इनाम स्वरूप 5100 का नकद ईनाम दिया जाएगा।

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शिकारियों की कसेंगे नकेल

वन क्षेत्र में वन्य जीवों को सुरक्षित रखने एवं शिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए शिकारियों का रिकार्ड बनाया जा रहा है। इसके लिए जिले के मांडलगढ़, आसीन्द, गंगापुर, भीलवाड़ा, जहाजपुर व शाहपुरा रेंंज क्षेत्र में किस प्रकार के शिकारी है और उनके शिकार की प्रवृत्ति किस प्रकार की है, यह जानकारी जुटाई जा रही है। शातिर शिकारियों की हिस्ट्रीशीट खोली जा कर उन पर कड़ीनजर रखी जाएगी। वन्य जीवों का शिकार करना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है और वाइल्ड एनीमल्स संरक्षण एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।

-डीपी जागावत, उपवन संरक्षक, भीलवाड़ा

Narendra Kumar Verma Reporting
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