गोस्वामी बोले, प्रवासी दे सकते है चुनौती

प्रवासी श्रमिक व आईसोलेट लोगों के लिए किस प्रकार की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की गई है इस को लेकर पत्रिका ने जिला शिशु एवं प्रजनन अधिकारी एवं क्वारंटीन नोडल अधिकारी डॉ. सीपी गोस्वामी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रवासियों की घर वापसी हो रही है ये अच्छी बात है, लेकिन कई चुनौतियां भी मिल रही है, समूचा जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग ऐसे में सतर्क है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 10 May 2020, 10:15 AM IST

भीलवाड़ा। रेड जोन से ऑरेंज जोन में आने के बाद भीलवाड़ा में प्रवासी लोगों के आने का रास्ता खुल गया है, रास्ता खुलने से लोगों की घर वापसी तो होने लगी है, लेकिन साथ ही कोरोना का खतरा भी जिले में मंडराने लगा है। एक पखवाड़े में आठ प्रवासी लोगों के कोरोना पाजिटिव आने के बाद जिले में संचालित होम क्वारंटीन व संस्थागत क्वारंटीन संभाल रहे अधिकारियों व कोरोना फाइटर्स की जिम्मेदारी कही अधिक बढ़ गई है। प्रवासी श्रमिक व आईसोलेट लोगों के लिए किस प्रकार की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की गई है इस को लेकर पत्रिका ने जिला शिशु एवं प्रजनन अधिकारी एवं क्वारंटीन नोडल अधिकारी डॉ. सीपी गोस्वामी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रवासियों की घर वापसी हो रही है ये अच्छी बात है, लेकिन कई चुनौतियां भी मिल रही है, समूचा जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग ऐसे में सतर्क है। डॉ.गोस्वामी से बातचीत के अंश

सवाल: कहां-कहां से आ रहे भीलवाड़ा प्रवासी
जवाब: देश के विभिन्न हिस्सों से आ रहे है, सूरत से आए चार प्रवासी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सतर्कता कही अधिक बढ़ा दी गई है। विभिन्न चैक पोस्टों पर स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की गई है, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही जिले में प्रवेश दिया जा रहा है। नाकों पर उपखंड अधिकारियों ंकी अगुवाई में रिपोर्टिग टीम काम कर रही है, संदिग्ध श्रमिकों की जांच भी कराई जा रही हे। अभी बारह हजार से अधिक टेस्ट भीलवाड़ा लेब के जरिए कराए जा चुके है।

सवाल: कितने प्रवासी का हुआ पंजीयन
जवाब: जिले में अभी देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रमिकों व अन्य लोगों का पंजीयन हो रहा है। अभी तक १८ हजार प्रवासी का पंजीयन हो चुका है, पंजीयन के आधार पर ये जानकारी सूचीबृद्ध की जा रही है कि ये लोग कब और कहां से आ रहे है, किस साधन से आ रहे है, ये क्या कार्य करते है तथा इनके स्वास्थ्य परीक्षण की क्या स्थिति है। इसी प्रकार वो किस जोन से आ रहे है, इनमें रेड व ऑरेंज जोन से आ रहे प्रवासियों के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर किसी प्रकार की कौताही नहीं बरती जा रही है।

सवाल: निगरानी का तरीका क्या है
जवाब: प्रवासी श्रमिक जो जिले में विभिन्न राज्यों से आने वाले है उनके समुचित स्वास्थ्य प्रबंधन समेत रिपोर्टिग एवं निगरानी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, प्रवासियों की संख्या बढऩे की स्थिति में इस पर अब और बेहतर तरीके से कार्य हा रहा है।

सवाल: क्या, जाना जा रहा है
जवाब: प्रवासी श्रमिकों को होम व संस्थागत क्वारंटीन में रखा जा रहा है। ये लोग कहां से आ रहे,बीच राह में किससे मिले और कहां ठहरे तथा जिले में प्रवेश के बाद उनकी दिनचर्या एवं मुलाकात किस प्रकार से रही है, इन सब पर बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। संदिग्ध एवं पॉजिटिव रोगियों के स्वास्थ्य रिपोर्ट भी जयपुर मुख्यालय को अवगत कराई जा रही है।

सवाल: क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्थाएं कैसी है
जवाब: जिला मुख्यालय के साथ ही उपखंड व पंचायत मुख्यालयों पर भी क्वारंटीन सेंटर स्थापित किए गए है। संस्थागत क्वारंटीन पर शिक्षक, नर्सिग, आंगनबाड़ी व आशा सहयोगनियोंं की सेवा लिए जा रही है, जबकि होम क्ंवारेटीन पर क्षेत्र के कोरोना फाइटर्स का सहयोग लिया जा रहा है। ये कोरोना फाइटर्स होम क्वारंटीन किए गए लोगों पर पूरी नजर रखे हुए है और उनके बारे में चिकित्सा विभाग को लगातार रिपोर्ट दे रहे है। चिकित्सा टीम भी उनके स्वास्थ्य की रिपोर्ट ले रही है। ट्रेकिंग सिस्टम के माध्यम से भी पुलिस की मदद से क्वारंटीन किए गए लोगों पर नजर रखी जा रही

सवाल: होम में किस प्रकार अपनाए सावधानी
जवाब: होम क्वारंटीन लोगों में से किसी के घर से बाहर जाने पर सूचना तत्काल मिलती है, उन्हें चेतावनी दी जाती है कि वे घर पर ही रहे सुरक्षित रहे, जो कक्ष आइसोलेट है, उस में भी मॉस्क लगा कर रहे और स्वच्छता का ध्यान रखे, होम क्ंवारेटीन की पालना नहीं करने पर ऐसे लोगों को बाद में कड़ी पाबंदियों के बीच संस्थागत क्वारंटीन किया जा रहा है । उन्हें ये मूलमंत्र भी दिया जा रहा १४ दिन की क्ंवारेटीन अवधि में वो मुंह व आंख को नहीं छुए और आत्मबल बनाए रखे।

सवाल: मातृ एवं शिशु का किस प्रकार से बचाव
जवाब: भीलवाड़ा रेड जोन से अब ऑरेंज जोन की श्रेणी में आ गया है, कोरोना को लेकर स्वास्थ्य सेवाएं धीरे धीरे और प्रभावशाली हो रही है। आरसीएच एवं मातृ एवं शिशु से जुड़ी सेवाओं को पूर्व की भांति शुरू किया जा रहा है। टीकाकरण सत्र शुरू हो चुका है। गुरुवार को ४०० से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित कर विभिन्न प्रकार के टीके लगाए गए। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर भी स्वास्थ्य सेविकाएं गंभीर है। सोशल डिस्टेंस रखने व मॉस्क लगाने पर खास जोर दिया जा रहा है।

सवाल: रोजाना कितने केस आ रहे है
जवाब:भ्भीलवाड़ा मेडिकल लेब में अभी रोजाना जांच के लिए सात सौ से अधिक सेम्पल आ रहे है, इनमें चित्तौडग़ढ़ जिले के निम्बाहेड़ा से भी साढ़े तीन सौ नमूने है। स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर संदिग्धों को होम व संस्थागत क्वांरेटीन किया जा रहा है।

सवाल: भीलवाड़ा मॉडल के बारे में क्या कहेंगे
जवाब: भीलवाड़ा रोल मॉडल में चिकित्सा से लेकर पुलिस विभाग व जनता का सहयोग रहा। चिकित्सकों व नर्सिग स्टाफ ने घंटों जाग कर पूरी लगन से कार्य किया, १८ मार्च को संदिग्ध रोगियों के आने के बाद जिला प्रशासन के कफ्यू, सीमाबंदी, रेण्डम सर्वे, जीरो मोबिलीटी जैसे उठाए कदम कारगर साबित रहे। वो खुद ग्रामीण क्षेत्र से लेकर ऑफिस में शुरूआती दिनों में रातों को सोए तक नहीं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ.राजन नंदा, सीएमएचओ डॉ. मुस्ताक खान व अधीक्षक डॉ.अरुण गौड़ के मार्ग निर्देशन में भी चिकित्सा टीमों ने अच्छा कार्य किया।

यूआईटी में बड़ा बदलाव, अब सब को सम्मान जिम्ेदारी, चार जोन में बांटा,

भीलवाड़ा. नगर विकास न्यास के कार्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव हुआ है। न्यास में अब किसी भ्भी अभियंता के जिम्मे शहर के प्रमुख कार्य नहीं होंगे। न्यास सचिव नितेन्द्र पाल सिंह ने बड़ी पहल करते हुए न्यास के कार्य क्षेत्र को चार जोन में विभक्त कर दिया है और न्यास के सभी चारों अधिशासी अभियंताओं को एक-एक जोन की कमान सौंपी है, इसी प्रकार सभी सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंताओं की भी जिम्मेदारी तय की है।

कोरोना संक्रमण से जुझ रहे भीलवाड़ा शहर में बेहतर नगर नियोजन एवं विकास कार्यो की गुणवत्ता में प्रभावी सुधार के साथ ही न्यास में अभियंताओं को समान कार्य के लिए न्यास सचिव नितेन्द्रपाल सिंह ने सोशल इंजीनियरिंग की है। इसके लिए न्यास में पहली बार कार्य क्षेत्र को भीलवाड़ा शहर को चार हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक जोन को तय सीमा में अलग-अलग बांटा गया गया है और इनमें भी सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंताओं के क्षेत्र तय किए गए। अभी तक न्यास में प्रभावशाली अभियंताओं के इर्द गिर्द ही प्रमुख कार्य व परियोजनाओं का कार्यभार रहता था, ऐसे में कई अधिशासी, सहायक व कनिष्ठ अभियंताओं की न्यास कार्यों में सहभागिता सिर्फ नाममात्र की ही रहती थी, लेकिन न्यास सचिव ने तमाम व्यवस्थाएं बदल दी है।

विद्युत व उद्यान रहेंगे स्वतंत्र
विद्युत कार्य व उद्यान क्षेत्र को स्वतंत्र रखा गया है। विद्युत कार्य की कमान अधिशासी अभियंता संदीप माथुर के जिम्मे रहेगी। उनकी टीम में सहायक अभियंता तेजमल शर्मा तथा कनिष्ठ अभियंता करणङ्क्षसह गिरनार रहेंगे। इसी प्रकार उद्यान निरीक्षक मोहम्मद रफीक प्रमुख पार्को, राजीव गांधी ऑडिटोरियम, ग्रीन बेल्ट, सामुदायिक भवन में स्थित उद्यानों के साथ ही शिवाजी पार्क, नेहरू उद्यान व स्मृति वन की व्यवस्था जोन के अधिशासी अभियंताओं की कार्य योजनाओं के अनुरुप संभालेंगे।

टीम वर्क से होगा बेहतर कार्य
न्यास की कार्यशैली को और प्रभावी बनाने के लिए चार जोन में विभाजित किया गया है, प्रत्येक जोन में अधिशासी अभियंताओं की अगुवाई में सहायक व कनिष्ठ अभियंताओं को जिम्मेदारी दी गई। नई व्यवस्था से कार्यक्षेत्र में न्यास की विभिन्न योजनाओं का कार्य अब अधिक बेहतर तरीके से हो सकेगा। जोन प्रभारी को क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए टीम वर्क के साथ कार्य करना होगा। निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझोता नहीं होगा।
नितेन्द्रपाल सिंह, सचिव नगर विकास न्यास

यू जानिए न्यास को चार जोन में

प्रथम जोन: प्रभारी अधिशासी अभियंता रामेश्वर शर्मा
सहायक प्रभारी: सहायक अभियंता रामप्रसाद जाट व अरविन्द व्यास
कनिष्ठ अभियंता: प्रवीण कुमावत, रोहन अजमेरा, रूचि अग्रवाल
सीमा: जोन में गंगापुर चौराहा से चित्तौडऱोड रेलवे लाइन से उदयपुर रोड, रामप्रसाद लढ़ा नगर से गंगापुर चौराहा मध्य का योजना एवं गैर योजना क्षेत्र
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द्वितीय जोन: प्रभारी अधिशासी अभियंता रविश श्रीवास्तव
सहायक अभियंता: जीतराम जाट
कनिष्ठ अभियंता: कमलेश जैन, खुर्रम अनवार, रामप्रसाद जाट
सीमा: गंगापुर रोड से अजमेर रोड, रेलवे लाइन से उदयपुर रोड,आरपी लढ़ा नगर के मध्य का हिस्सा, समस्त योजना एवं गैर योजना क्षेत्र
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तृतीय जोन: प्रभारी अधिशासी अभियंता करणराज जीनगर
सहायक प्रभारी: सहायक अभियंता बह्रालाल शर्मा
कनिष्ठ अभियंता: विशाल सिंह, पवन जीनगर, रविन्द्र कुशवाह
सीमा: अजमेर चौराहा से अजमेर रेलवे लाइन तथा कोटा रोड से अजमेर चौराहा के मध्य का समस्त योजना एवं गैर योजना क्षेत्र
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चतुर्थ जोन: प्रभारी अधिशासी अभियंता सतीश शारदा
सहायक प्रभारी: सहायक अभियंता महिपाल ढाका
कनिष्ठ अभियंता: लोकेश चन्दोरा, किशोर इसरानी
सीमा: कोटा रोड एवं कोटा रोड से चित्तौडऱोड, रेलवे लाइन के मध्य का संपूर्ण क्षेत्र एवं जिला कलक्ट्रेट ( नेहरू विहार को छोड़ कर )

Narendra Kumar Verma Reporting
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