कफ्र्यू व लॉकडाउन के बाद भी सैकड़ों की संख्या में मजदूर जमा हुए सड़क पर

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, एसडीएम के सामने रो पड़ी महिलाएं
मजदूरों ने कहां हमारी मांगे नहीं मानते तो फिर बड़ी संख्या में मजदूर कलक्ट्रेट पर देंगे धरना

By: Suresh Jain

Published: 10 May 2020, 09:13 PM IST

भीलवाड़ा .

कपड़ा फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने गांव उत्तर प्रदेश व बिहार जाने के लिए सड़कों पर उतर आए है। पिछले ५१ दिनों से मजदूर घर पर बिना किसी वेतन के बैठे है। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मकान मालिक किराए का तकाजा करते है। मकान खाली करने की धमके देते है। आखिर मजदूर कहां जाए। ऐसे में अब उनके कदम अपने गांव जाने के लिए अपने घर से बाहर निकल पड़े है। सुबह ६ बजे घर से निकले श्रमको को संभालने के लिए पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी करीब ढाई घंटे बाद मौके पर पहुंचा। तब तक मजदूर पुर रोड स्थित आईटीआई मैदान के सामने सफेदा के पेड़ों के नीचे खड़े होकर हमारी मांगे पूरी करो के नारे लगाते रहे।
कोरोना वायरस को लेकर चल रहे लॉकडाउन के कारण बंद पडी कपडा यूनिटो के पिछले 5१ दिनों से घरों में कैद मजदूर बेरोजगारी से परेशान हो सड़क पर उतर आए। सोमवार को बाजार खोलने की अनुमति जारी करने से ठीक एक दिन पहले एक हजार मजदूर एक जगह पर एकत्रित होना ही प्रशासन की नाकामी को दर्शा रहा है। सभी मजदूर अपने घर जाना चाहते है। एक स्थान पर एकत्रित हुए मजदूरों की सूचना मिलने के दो घंटे बाद प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
उद्यमी कर रहे गुमराह
दिनेश सिंह ने उद्यमियों को कटघरे में लेते हुए कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रशासन को भी गुमराह कर रहें हैं। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। जबकि प्रशासन को कह दिया की हम भुगतान कर रहें हैं। वहीं श्रमिकों ने चेतावनी दी है की अगर जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गई और उनकी और ध्यान नहीं दिया गया तो यह भीड़ कलक्ट्रेट तक भी पहुंचेगी और धरना देगी। दिनेश ने कहा कि जब चित्तौड़ रोड़ की ओद्यौगिक इकाइयों को चालु किया जा सकता है तो रिको में चालु करने में क्या समस्या आ रही है। क्या लॉकडाउन के तहत दोनो क्षेत्रों के अलग अलग नियम हैं क्या। वही सोशल डिस्टेंसिंग की बात करते है। जब मजदूर सुबह बसों में जाते है तो बस भरी हुई जाती है। फैक्ट्री में रहने वाले मजदूर एक कमरे में १० से २० मजदूर रहते है। वहा सोशन डिस्टेंसिंग कहां गई।
ये है मजदूरों की प्रमुख मांगें
पूर्वचल जन चेतना समिति के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने पुलिस व उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन देते हुए कहा कि मजदूरों को उनके गांव जाने दो। श्रमिकों से समझाईश करने पहुंची उपखंड अधिकारी टीना डाबी के सामने श्रमिकों ने अपनी मांगी रखी।
- मार्च और अप्रेल माह का वेतन दिलाया जाए।
- 3 माह का मकान किराया माफ किया जाए।
- ३ माह का बिजली, पानी का बिल व स्कूल फीस माफ हो।
- बिना किसी भेदभाव के राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
- श्रमिक के पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें भी खाद्य योजना के तहत नि:शुल्क सामग्री देवे।
- श्रमिक अपने घर जाना चाहें उन्हें पास उपलब्ध करावें।
- श्रमिकों को मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ व बांग्लादेश भेजा जाए।

Suresh Jain Reporting
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