अपने आपको को पहचानना ही उत्तम मार्दव धर्म

शाम को मंदिरों में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम

By: Suresh Jain

Updated: 05 Sep 2019, 10:57 AM IST

भीलवाड़ा।
Uttam Mardav 2019 मानव जीवन में अहं पालता रहता है ओर जीवन इसी अहं की संतुष्टी में बीत जाता है। हम अपने आपको ज्ञानी, धनवान, सेठ, नेता कुछ न कुछ मानते रहते है। यह विशेषण रुपी अंहकार ही हमारा जीवन खराब कर रहा है। इन विशेषणों से परे हो जाओ, अपने आपको पहचानों, यही उत्तम मार्दव है। कुएं के समान अपने चारों ओर दिवारे मत बनाओ, अंहकार रुपी दिवाल तोडकर सागर बन जाओ, आज अंहकार के विसृजन का दिन है। यह बात आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर बोलते हुए पंडित विक्रम शास्त्री ने कही।

Uttam Mardav 2019 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि बुधवार को रुपचन्द, नरेश गंगवाल ने 108 रिद्धी मंत्रों से तथा निर्मल सोनी, महेन्द्र बाकलीवाल, मयूर शाह, विवेक बाकलीवाल, अजय बाकलीवाल, राजेश विनायका, विनोद बाकलीवाल ने अन्य प्रतिमाओं पर शांतिधारा की।


सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की। विनय कोठारी, सुरेन्द्र गोधा, कमल पाटनी के सान्निध्य में संगीतमय सामुहिक पूजा की गई। इसमें राजकुमार अग्रवाल, माणक सोनी, खेमराज कोठारी, दिनेश बज, शकुन्तला पाण्डया, मंजुलता पहाडिया पूनम कोठारी सहित सैकडों श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया। दोपहर तीन बजे से सामुहिक स्वाध्याय में पं. शास्त्री ने तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया। शाम को प्रतिक्रमण किया गया। क्तामर आरती की गई। आदिनाथ महिला मण्डल की ओर से माँ का दिल नामक नृत्य नाटिका का मंचन किया गया।

हाऊसिंग बोर्ड शास्त्रीनगर स्थित सुपाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पण्डित निलेश शास्त्री ने बताया कि उत्तम मार्दव का अर्थ मृदुता कोमलता है। मानव कषाय के अभाव में उत्तम मार्दव धर्म प्रकट होता है। उत्तम मादर्व का तात्पर्य अपने स्वभाव में कोमलता तथा अपने भावों को मधुर बनाना होता है। जनसंपर्क मंत्री भागचंद पाटनी ने बताया कि सुबह जम्बू, अमित, अनूप, वियान गदिया, पंकज ने शांतिधारा की। पूजा पण्डित पदमचन्द काला ने करवाई। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सुपाश्र्वनाथ सोशल समिति के तत्वावधान में विचित्र वेशभूषा प्रतियोगिता हुई।


मैन सेक्टर शास्त्री नगर पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। चंद्रप्रकाश, रमेश, सुरेश पाटनी ने 108 रिद्धि मंत्रो से शांतिधारा की। दोपहर में इंदौर से आई दीदी ने तत्व चर्चा करते हुए उत्तम मार्दव धर्म के बारे में बताया। ट्रस्टी विजय झांझरी ने बताया कि शाम को आरती व भक्ताम्बर पाठ हुआ। बाद में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ।

Suresh Jain Reporting
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