फसल कटाई को नहीं मिले मजदूर तो थामा एक दूसरे का हाथ

कोरोना संकट से मिलकर लड़ रहे काश्तकार

By: Suresh Jain

Published: 18 Apr 2020, 09:09 AM IST

भीलवाड़ा
संकट की घड़ी में जो साथ आए, वहीं सच्चा साथी कहलाता है। कोरोना संकटकाल ने सच्चे साथियों की पहचान कराई। शहरों में भले ही प्रशासन की ओर से अच्छी खासी मदद पहुंच जाती है लेकिन ग्रामीण अंचल अब भी एक दूसरे के सहारे ही बुरे दौर से पार पा रहे हैं। इन दिनों खेतों में फसलें खड़ी है। श्रमिक मिलने में मुश्किल हैं। एेसे में एक दूसरे की मदद कर किसान अपनी नैया पार लगाने में जुटे हैं।

रख रहे सोशल डिस्टेंस
कोटड़ी. क्षेत्र में किसान सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते खेती-बाड़ी में जुटे हैं। अभी गांवों में मजदूर नहीं मिल पा रहे। लिहाजा लोग एक दूसरे का साथ दे रहे हैं। यानी खेतों में आपस में सहयोग के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। संकट की घड़ी में पड़ोसी व गांव के युवा साथी संकट के साथी बने है। जावल सरपंच अंबेश चौधरी ने बताया कि अखेपुर के कैलाश चन्द्र, भैरुनाथ, हरि चौधरी, शिवलाल समत बड़ी संख्या में युवा फसल कटाई व अनाज निकलवाने में हाथ बंटा रहे हैं। लोग बारी-बारी अपने खेतों में जाते हैं और फसल कटाई को अंजाम दे रहे हैं।

गमछे बने मास्क
जहाजपुर. क्षेत्र के पीपलुन्द में देर शाम तक किसान खेतों में फसल एकत्र करने व कटाई में व्यस्त दिखे। सब ओढऩी व गमचे से मुंह ढककर काम कर रहे थे। देर शाम तक कार्य के बारे में पूछा तो जवाब मिला-लॉकडाउन के चलते सब घरों में बंद है। ऐसे में श्रमिक नहीं मिल रहे है। जैसे तैसे देर शाम तक काम निपटा रहे हैं। खेत के पड़ोसी एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। पहले वे हमारी फसल कटाते हो तो फिर हम उनकी। मदनलाल बलाई का कहना है कि एक दूसरी की मदद से ही फसल कट रही है। श्रवण बलाई ने बताया कि लॉकडाउन में श्रमिक नहीं मिल रहे है।

पड़ोसी ने कराई नैया पार
करेड़ा . इस वक्त गेहंू की फसल कटने की स्थिति में है। मजदूर नहीं मिल रहे। पड़ोसी ही संकटमोचक बने हैं। चावंडिया में सोहनलाल कुमावत के खेत मे गेहंू की फसल खड़ी है। अभी काटने का समय है पर मजदूर नहीं मिले। ऐसे समय में पड़ोसी फसल काटने में मदद कर रहे हैं। चावंडिया के हीरालाल कुमावत, मांगीदेवी कुमावत, नर्मदा कुमावत, कगलु कुमावत, तीन दिन से पड़ोसी सोहनलाल के खेत में फसल कटाई में मदद कर रहे हैं। सोहनलाल का परिवार इसके बाद इनकी मदद करेगा।


महिलाओं ने दिया साथ
रायपुर .खेतों में फसल काटने व निकालने को श्रमिक नहीं मिल रहे। मौसम बार बार बदल रहा है। किसान चिंतित हैं। रायपुर में राजू माली ने बताया कि परिवार में कार्य करने वाले सदस्यों के अलावा काका बालुराम व उनके बेटे नारायण व महिलाओं ने मिलकर फसल काटी। पास के खेत में काका की फसल को काटने में भुरालाल माली के बेटे बाबूलाल, शंकर, मुकेश, राजू के अलावा परिवार की महिला सदस्य भी जुटी। ऐसे कई परिवारों के साथ पड़ोसियों ने खेतों में काम कराया। फसल काटने हो या मशीन से निकलवाई, हर काम में एक दूसरे की मदद की जा रही है।

Suresh Jain Reporting
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