मोरेटोरियम का नहीं बढ़ा समय तो सितंबर से चुकानी होंगी किश्तें

उद्यमियों को सताने लगी चिन्ता

By: Suresh Jain

Published: 24 Aug 2020, 03:03 AM IST

भीलवाड़ा .
दो माह का लॉकडाउन के बाद हुआ अनलॉक के बाद भी टेक्सटाइल उद्योग अब भी अपनी गति नहीं पकड़ सका है। ऐसे में ईएमआइ चुकाने वाले ग्राहकों के लिए अगर मोरेटोरियम का समय नहीं बढ़ा तो सितंबर से किश्ते चुकानी होंगी। कोविड-19 संकट के कारण देश के सभी उद्योगों व आम जन की स्थिति ठीक नहीं है। या यू कहे उद्योग अपनी पटरी पर नहीं लौटे है तो कोई अतिशोक्ति नहीं है। ईएमआइ अदायगी पर मार्च में जो रोक लगी थी, वह 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। बैंकिंग सेक्टर में इसे आगे बढ़ाने को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। खुदरा लोन होम, आटो, पर्सनल लोन जैसी सावधि कर्ज योजनाओं के तहत लिए गए लोन को किस तरह से जारी रखा जाए, इसका खाका स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर उद्योगपति के माथे पर अभी से चिन्ताओं की लकीरे नजर आने लगी है।
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष अतुल शर्मा का कहना है कि कोरोना के कारण लोन की किश्ते मार्च से बन्द थी, लेकिन अब यह किश्ते जमा करानी होगी। खुदरा लोन में निजी बैंकों की हिस्सेदारी ज्यादा है, लेकिन उनकी तरफ से अभी कोई संकेत नहीं मिला है। आरबीआइ ने यह स्पष्ट किया था कि सिर्फ उन्हें ही यह सुविधा दी जाएगी जिनकी आमदनी कोविड-19 की वजह से प्रभावित हो। आरबीआइ के अनुसार किसकी मासिक किस्त माफ करनी है और किसकी नहीं, इसका फैसला खुद बैंकों को करना है। लेकिन अभी तक किसी ने कोई निर्णय नहीं किया है। आरबीआइ ने मौजूदा मोरेटोरियम को लेकर दो अहम घोषणाएं की थीं। पहला यह कि कॉरपोरेट लोन रिस्ट्रच्करिंग (नए सिरे व नई शर्तों के साथ कर्ज चुकाने की व्यवस्था) पर केवी कामथ के नेतृत्व में समिति गठित की गई। लेकिन खुदरा लोन की ईएमआइ वसूली पर पिछले छह महीनों से जो रोक लगी हुई थी, उसके बारे में बैंकों को ही फैसला करने को कहा गया है।
बैंकों का मानना है कि जिनकी आमदनी बरकरार थी, उनमें से भी बहुत ग्राहकों ने कर्ज अदायगी नहीं की और मोरेटोरियम का फायदा उठाया। बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि उनकी आतंरिक रिपोर्ट के अनुसार मोरेटोरियम का फायदा उठाने वालों में 45-55 वर्ष आयुवर्ग के ग्राहकों की संख्या काफी है। इसमें से बहुत बड़ी संख्या उनकी है जो वेतन भोगी हैं और आय पर कोई असर नहीं होने के बावजूद वो कर्ज भुगतान नहीं कर रहे हैं।
यह है बैंकों की परेशानी
बैंकों का कहना है कि उनके लिए खुदरा लोन की अदायगी पर और राहत दे पाना मुश्किल है। इसकी मुख्य वजह कि पिछले छह महीने से न तो लोन हो रहा और ना ही लोन की वसूली हो रही है। इससे बैंकों की गतिविधियों पर असर पड़ा है। उधर उद्यमी शर्मा का कहना है कि कोरोना से उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही रुपए की नाणा तंगी बनी हुई है। लेन-देन बिलकुल नहीं हो रहा है। ऐसे में किश्ते चुकाना मुश्किल होगा। ऐसे में केन्द्र सरकार व आरबीआई को राहत देने पर विचार किया जाना चाहिए।

Suresh Jain Reporting
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