आमदनी कुछ भी नहीं, खर्चा रुपैय्या

हजारों रुपए खर्च के बाद भी परिषद को एक रुपए की आय नहीं
जोनल प्लान नहीं होने से दस दिनों में एक भी पट्टा जारी नहीं हुआ
खर्च को बचाने के लिए हटाए टेंट

By: Suresh Jain

Published: 13 Oct 2021, 09:25 AM IST

भीलवाड़ा।
इसे कहते हैं आमदनी कुछ भी नहीं, खर्चा रुपैय्या। प्रशासन शहरों के संग अभियान शुरू होने के दस दिन बाद भी पट्टों से राजस्व वसूली में नगर परिषद के हाथ खाली हैं। गांधी जयंती से अब तक नगर परिषद पट्टों से एक रुपए भी प्राप्त नहीं कर पाया है। जबकि शिविर का आयोजन कर टैंट, टेबल, कुर्सियां, पानी सहित विभिन्न व्यवस्थाओं में रोज हजारों रुपए खर्च जरूर हो रहा है। परिषद की ओर से नगर परिषद कार्यालय परिसर में आयोजित हो रहे शिविरों में न लोग पहुंच रहे हैं और ना ही राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है। शिविर महज औपचारिक बनकर रह गए हैं। इसके चलते परिषद ने ६ अक्टूबर के बाद एक भी शिविर नहीं लगाया है। शिविर २० अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर रखे हैं। परिषद की ओर से केवल तीन शिविर ही लगाए गए हैं। वह भी २, ५ व ६ अक्टूबर को आयोजित हो चुके हैं।
एक भी नया पट्टा जारी नहीं
तीन दिन के अभियान के दौरान परिषद पूर्व तैयारी शिविरों सहित अभियान अवधि के पहले दस दिनों में एक भी नया पट्टा जारी नहीं कर पाया है। हालांकि इस दौरान कई आवेदन परिषद को प्राप्त हुए हैं। कई पट्टा आवेदनों में तकनीकी अडचनें बनी हुई हैं, तो कई न्यायालय के आदेश के बाद बिना जोनल प्लान के बनने संभव नहीं हो पा रहे हैं। 69-क के तहत पट्टे जारी हो सकते हैं, लेकिन परिषद इसके लिए लोगों को प्रेरित करने में अब तक सफल नहीं हो पाई है।
69-क पर करना होगा फ ोकस
अभियान के दौरान वर्तमान स्थिति अनुसार परिषद को 69 -क के तहत पट्टे जारी करने में कोई अड़चन नहीं है। इसके लिए जोनल प्लान की भी आवश्यकता नहीं है। परकोटा क्षेत्र में इस श्रेणी में पट्टे बनाने की पर्याप्त संख्या भी उपलब्ध हो सकती है। आवश्यकता है परिषद को परकोटा क्षेत्र पर फोकस करने की।
नहीं बना जोनल प्लान
प्रशासन शहरों के संग अभियान में बिना जोनल प्लान के न नगर परिषद पट्टे जारी कर पा रही है और ना ही नगर विकास न्यास। न्यायालय भी जोनल प्लान के अनुसार चिह्नित पट्टों की श्रेणियों में पट्टे जारी करने का निर्देश दे चुका है। ऐसे में नगर परिषद और नगर विकास न्यास नियमन संबंधित पट्टे जारी नहीं कर पा रहे हैं। केवल 69-क के तहत पट्टे के बदले पट्टे जारी करने का विकल्प पूरा खुला हुआ है। इसमें परिषद और न्यास पट्टे दे सकते हैं। वहीं जोनल प्लान नहीं होने से नगर परिषद और न्यास न अभियान के दौरान प्राप्त हुए आवेदनों पर कुछ प्रक्रिया कर पा रहा है और ना ही अभियान शुरू होने से पहले जो पट्टों के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे, उन आवेदकों को पट्टे जारी कर पा रहा है। बताया जा रहा है कि दर्जनों ऐसी फाइलें है जो बिना जोनल प्लान के कारण अटक गई है। जोनल प्लान प्रभावी होने के बाद ही इन फाइलों पर कुछ निर्णय हो सकेगा। कच्ची बस्तियों में नियमन, स्टेट ग्रांट और कृषि भूमि पर बसी आवासीय आबादियों पर बिना जोनल प्लान निर्णय नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के अनुसार 90 ए व 90 बी कॉलोनियों में ही पट्टा दिया जा सकता है।
पहले ध्यान नहीं दिया अब आमजन हो रहे परेशान
राज्य सरकार करीब तीन साल पहले ही जोनल प्लान तैयार करने के आदेश जारी कर चुकी थी। परिषद और न्यास ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। न्यास ने एक फर्म को कार्यादेश जारी कर भी दिया था, लेकिन जोनल प्लान की ओर ध्यान नहीं देने से अभियान शुरू होने के एक सप्ताह बाद तक न्यास का एक भी जोनल प्लान सामने नहीं आ पाया है। न्यास अधिकारियों के अनुसार न्यास के तीन जोनल प्लान तैयार हंै। दो और बनने हैं। कब तक बनेंगे, इस पर अधिकारी भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हंै। वहीं नगर परिषद का जोनल प्लान अभी तक शुरू ही नहीं हो पाया है। न्यास बनाएगा या निगम स्वयं, इस पर भी असमंजस की स्थिति है।

Suresh Jain Reporting
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