बीटी कपास को लेकर किसानों में बढ़ा रूझान

जिले में कपास की बुवाई का 40000 हैक्टेयर का रखा लक्ष्य
उत्पादन में कमी आई तो देसी व अमेरिकन कपास से किसानों का मोह भंग
अब तक 30 हजार से अधिक की हो चुकी बुवाई

By: Suresh Jain

Published: 01 Jul 2019, 05:16 PM IST

भीलवाड़ा।
जिले में बीटी कपास किसानों के लिए वरदान बन गया है। जिले में पिछले तीन के आंकड़ों पर नजर डाले को कपास की खेती लगातार बढ रही है। पिछले साल ४० हजार से कम हैक्टेयर में बुवाई के लक्ष्य रखा था वह भी बढ़ गया है। इस साल पानी की कमी को देखते हुए ४० हजार हैक्टेयर में बीटी कपास की खेती का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह आकंड़ा ३० हजार तक पहुंच गया है। किसान भी इसकी खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। सफेद सोने के नाम से पहचाने जाने वाली बीटी कपास किसानों के लिए फायदे का सौदा बन गई है। किसान पहले देशी कपास व अमरीकन कपास की खेती करते थे लेकिन लटों व कीटों के प्रकोप से 30 से 50 प्रतिशत फसल नष्ट होने से किसानों को फायदा नहीं मिलता था। बीटी कपास की बुआई ने किसानों की काया पलट दी। किसान सिंचित क्षेत्र में पहले ग्वार, ज्वार व कपास की नाममात्र रकबे में बुवाई करते थे। आज वे कपास की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। मौसम अनुकूल रहने पर किसानों को बीटी कपास की फसल से ८ से १० हजार रुपए प्रति बीघा की कमाई हो जाती है।
कृषि विभाग के अनुसार कुछ किसान अन्य किस्म के कपास की खेती करते थे, लेकिन इस फसल मे अमेरिकन सुंडी, पिंक, विभिन्न प्रकार की लटों सहित कीटों का प्रकोप बहुत अधिक होता था। इससे फसल प्रभावित हो जाती थी। वहीं कीटों की रोकथाम के लिए महंगे कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता था। कपास के उत्पादन में खर्च अधिक और आमदनी कम होने से धीरे-धीरे किसानों का मोह भंग होने लगा। इसके बाद बीटी कपास का बीज आने के बाद किसानों का रुझान बढ़ा। बीटी कपास एक आनुवांशिक संशोधित कपास है। इस बार जिले में ४० हजार हैक्टेयर में कपास की बुवाई का लक्ष्य रखा है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो इसकी बुवाई ६0 हजार हैक्टेयर तक हो सकती है।
विभाग के अनुसार देसी व अमेरिकन कपास का उत्पादन प्रति बीघा औसतन चार क्विंटल होता है, जबकि बीटी कपास का उत्पादन छह से आठ क्विंटल प्रति बीघा होता है। ऐसे में किसानों का रुझान बीटी कॉटन के प्रति बढ़ता जा रहा है।
बीटी का उत्पादन अधिक
भादू के किसान कालूराम का कहना है कि पिछले कई वर्षों से बीटी कपास का उत्पादन अच्छा रहा है। इस बार खेत में सर्वाधिक बीटी कपास की बुवाई की गई है। इसमें रोग का प्रकोप भी कम होता है जिससे फसल पर खर्च कम आता है।
प्रति बीघा ७-८ क्विंटल औसतन उत्पादन
बीटी कपास का औसतन उत्पादन प्रति बीघा ७ से ८ क्विंटल होता है। इस कारण किसानों का रूझान बीटी के प्रति बढ़ता जा रहा है। देसी व अमेरिकन कपास की बुवाई का क्षेत्रफल घटने का सबसे बड़ा कारण यही है। इसके अलावा कीटों का प्रकोप भी बीटी कॉटन में कम होता है।
जीएल चावला, उप निदेशक कृषि विस्तार भीलवाड़ा

Suresh Jain Reporting
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