बंदियों से मुलाकात में खतरा मोल रहा जेल प्रशासन

बंदियों को परिजनों से मुलाकात कराने में भीलवाड़ा जिला कारागार प्रशासन बड़ा खतरा मोल ले रहा है। इसका कारण है कि कारागार के मुख्य द्वार से होकर परिजनों से मिलने बंदी तय स्थान पर आते हैं। इस दौरान मुख्यद्वार खोलने या बंद करते समय रही जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। नियमों के मुताबिक इस व्यवस्था को सही नहीं ठहराया जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से इस तकनीकी खामी से यहां के अधिकारी जेल मुख्यालय को कई बार अवगत करा चुके है।

By: Akash Mathur

Updated: 27 Jun 2021, 10:04 AM IST

भीलवाड़ा. बंदियों को परिजनों से मुलाकात कराने में भीलवाड़ा जिला कारागार प्रशासन बड़ा खतरा मोल ले रहा है। इसका कारण है कि कारागार के मुख्य द्वार से होकर परिजनों से मिलने बंदी तय स्थान पर आते हैं। इस दौरान मुख्यद्वार खोलने या बंद करते समय रही जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। नियमों के मुताबिक इस व्यवस्था को सही नहीं ठहराया जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से इस तकनीकी खामी से यहां के अधिकारी जेल मुख्यालय को कई बार अवगत करा चुके है। यहां तक कि मुलाकातियों तक बंदियों को लाने का द्वार द्वार पीछे से निकालने का प्रस्ताव भी भेज चुके हैं। वह जेल पुलिस महानिदेशक के यहां फाइलों में ही गुम हो गया है।

यह है खतरा
मुख्यद्वार तक आया बंदी मौका देखकर फरार हो सकता है। इसके साथ ही किसी बंदी पर बाहर से हमला हो सकता है। प्रहरियों के नजर चूकते ही मादक पदार्थ, हथियार या अन्य अवांछित वस्तु बंदियों तक पहुंच सकती है।

यह है व्यवस्था
सप्ताह में बुधवार और रविवार को बंदियों से परिजनों की मुलाकात कराई जाती है। इसके लिए एक बार में १० से १२ बंदियों को मुख्यद्वार के बाद लगे लोहे के गेट से अंदर लिया जाता है। उसके बाद ये बंदी मुख्यद्वार के गलियारे से होकर मुलाकात कक्ष में पहुंचते है। गलियारे में मुख्यद्वार से दूरी पांच कदम भी दूर नहीं है। जिले के उप कारागारों के हालात तो और खराब हैं। वहां प्रहरियों की संख्या पूरी नहीं है और उनके पास न पूरे हथियार हैं। हालांकि कोरोना को देखते हुए मुलाकात फिलहाल बंद है।

लेना पड़ा सबक
२७ नवम्बर २०११ को गंगापुर उपकारागार से प्रहरी को धक्का देकर छह बंदियों के भागने की घटना से सबक लेते हुए जेल प्रशासन ने नवनिर्माण करा कर मुलाकात कक्ष का द्वार जेल के भीतर से कर दिया। उपकारागार की दीवारों को भी ऊंचा कर दिया गया।

यह है नियम
नियमानुसार परिजनों से मुलाकात कराने के लिए बंदी मुख्यद्वार तक नहीं आएं, बल्कि कारागार के भीतर ही मुलाकात कक्ष तक रास्ता होना चाहिए। जिला कारागार में एेसी व्यवस्था नहीं होने से मुलाकात के समय हर पल खतरा बना रहता है।

इनका कहना है
जिला कारागार में मुख्यद्वार से होकर ही बंदियों का मुलाकात कक्ष तक पहुंचना सुरक्षित नहीं है। जेल के भीतर से मुलाकात कक्ष तक रास्ता होना चाहिए। इसके लिए पूर्व में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था।
- प्रमोदसिंह, उपाधीक्षक, जिला कारागार, भीलवाड़ा

Akash Mathur
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