भीलवाड़ा जिला प्रमुख की कुर्सी पर परिवार-वाद की गणित

जिला परिषद के मुखिया यानि जिला प्रमुख की सीट को लेकर इस बार पंचायती राज चुनाव में परिवार वाद हावी है। साठ साल के इतिहास में पहली बार जिला प्रमुख की सीट अनुसूचित जनजाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने से परिवारवाद को जीत में तब्दील करने के लिए दोनों दल राजनीतिक दांवपेच लगाए हुए है, यह दांव कितना सटीक बैठेगा, इसका खुलासा १० दिसम्बर तक हो जाएगा, इससे पहले अटकलों का दौर ही सियासी गलियारे में हारजीत के दावे तय करेगा।

By: Narendra Kumar Verma

Updated: 21 Nov 2020, 01:19 PM IST

भीलवाड़ा। जिला परिषद के मुखिया यानि जिला प्रमुख की सीट को लेकर इस बार पंचायती राज चुनाव में परिवार वाद हावी है। साठ साल के इतिहास में पहली बार जिला प्रमुख की सीट अनुसूचित जनजाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने से परिवारवाद को जीत में तब्दील करने के लिए दोनों दल राजनीतिक दांवपेच लगाए हुए है, यह दांव कितना सटीक बैठेगा, इसका खुलासा १० दिसम्बर तक हो जाएगा, इससे पहले अटकलों का दौर ही सियासी गलियारे में हारजीत के दावे तय करेगा।

जिले में पहली बार अनुसूचित जनजाति महिला वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने के बावजूद भाजपा व कांग्रेस में एसटी वर्ग की दमदार महिला नेता व कार्यकर्ता नहीं है। ऐसे में दोनों ही दलों के एसटी वर्ग के नेताओं ने इस बार अपने परिवार की महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा ने जहाजपुर के पूर्वविधायक शिवजीराम मीणा की पुत्रवधू कविता मीणा को वार्ड २२ से उतारा है। वही कांग्रेस ने मांडलगढ़ के पूर्व प्रधान कैलाश मीणा की पत्नी श्यामा वार्ड १७ से टिकट दिया है, जबकि मीणा के भाई की पत्नी मीनाक्षी मीणा वार्ड ०६ से मौका दिया है। जिला परिषद में कुल ३७ वार्ड है, इनमें तीन वार्ड में कांग्रेस निर्विरोध चुनाव जीतते हुए स्थिति मजबूत कर चुकी है।

तीन सीट भाजपा ने गंवाई
भाजपा की तीन महिला प्रत्याशी वार्ड संख्या ११ से रतन कंवर ओबीसी वर्ग, वार्ड संख्या १९ से ज्योति बाला मंत्री सामान्य वर्ग व वार्ड ३५ से लहरी देवी गुर्जर ओबीसी वर्ग के नामांकन पत्र खारिज खारिज होने से कांग्रेस के खाते में तीनों सीट बिना चुनाव लड़े खाते में आ गई है। वार्ड संख्या ११ से लाली गाडरी, वार्ड १९ से कमला देवी व वार्ड ३५ से गजरी गुर्जर निर्विरोध निर्वाचित रही है।

इनमें से एक प्रबल दावेदार
जिला परिषद की ३७ में से चार सीट एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। इनमें वार्ड छह में भाजपा की शांति भील के सामने कांग्रेस की मीनाक्षी मीणा है, वार्ड आठ में भाजपा की वरजी बाई का मुकाबला कांग्रेस की कमला भील से है। वार्ड २८ में भाजपा की मीरा के सामने कांग्रेस की छन्नू देवी है। वार्ड ३३ में भाजपा की सुनीता व कांग्रेस की नीतू में मुकाबला है। इसी प्रकार चार सामान्य वार्ड से भी एसटी की दो महिलाएं चुनौती दिए हुए है। वार्ड २२ में भाजपा की कविता व कांग्रेस की शांति आमने सामने है। वार्ड १७ में कांग्रेस की श्यामा मीणा व वार्ड ६ में मीनाक्षी मीणा प्रत्याशी है।


जिला प्रमुख पद का सफर
२ अक्टूबर १९५९ को पहली बार निर्वाचित जिला प्रमुख कांग्रेस के रमेश चन्द्र व्यास चुने गए। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री व मांडलगढ़ विधायक शिवचरण माथुर ११ मार्च १९६१ से २५ फरवरी १९६५ तक जिला प्रमुख रहे। कांग्रेस के ही यशवंत सिंह नाहर २६ फरवरी १९६५ से ८ अगस्त १९७७ तक रहे, जबकि कांग्रेस के हफीज मोहम्मद ७ जनवरी १९८२ से १० जुलाई १९८८ और इसके बाद २० जुलाई १९८८ से २६ जुलाई १९९१ तक करीब नौ साल तक जिला प्रमुख रहे। भाजपा के पहले जिला प्रमुख डॉ. रतनलाल जाट बने। जाट १३ फरवरी १९९५ से ११ दिसम्बर १९९८ तक जिला प्रमुख रहे। इसके बाद उनके विधायक निर्वाचित होने पर उप जिला प्रमुख रतनलाल भील उप चुनाव जीते और १२ दिसम्बर १९९८ से ११ फरवरी २००० तक जिला प्रमुख रहे। सामान्य महिला वर्ग की सीट होने से कांग्रेस की कमला धाकड़ १२ फरवरी २००० से ०९ फरवरी २००५ तक जिला प्रमुख रही। इसके बाद भाजपा से इंजीनियर कन्हैयालाल धाकड़ १० फरवरी २००५ से १७ फरवरी २०१० तक जिला प्रमुख रहे।

आरक्षण की बदली गणित
आरक्षण लॉटरी में जिला प्रमुख सीट का कोटा अनुसूचित जाति महिला वर्ग में आने से कांग्रेस की सुशीला सालवी १८ फरवरी २०१० से ७ फरवरी २०१५ तक जिला प्रमुख रही। इसके बाद ये सीट फिर सामान्य वर्ग में आने से भाजपा के पीरचंद सिंघवी ७ फरवरी २०१५ को जिला प्रमुख चुने गए, लेकिन सिंघवी का आकस्मिक निधन ११ अगस्त २०१६ को होने से उप चुनाव हुए। इसमें भाजपा के ही शक्तिसिंह हाडा २ दिसम्बर २०१६ को जिला प्रमुख चुने गए। उपचुनाव से पूर्व भाजपा के उप जिला प्रमुख रामचन्द्र सेन २९ अगस्त २०१६ से २ दिसम्बर २०१६ तक जिला प्रमुख रहे।

Narendra Kumar Verma Reporting
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