भीलवाड़ा के अस्पताल में दिल के टुकड़े ने दम तोड़ा तो चिकित्सा विभाग ने लिया बड़ा फैसला

patrika.com/rajsthan news

By: jasraj ojha

Published: 05 Jan 2020, 01:06 PM IST


भीलवाड़ा. महात्मा गांधी जिला अस्पताल में हर माह हो रही नवजात शिशुओं की मौत को चिकित्सा विभाग ने गंभीरता से लिया है। अब शिशु मृत्यु के कारणों का ऑडिट किया जाएगा। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने शनिवार को 'हमारे अस्पताल में भी दम तोड़ रहे दिल के टूकड़े Ó शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन ने इसमें सजगता दिखाई है। अब जन्म से 5 साल तक के बच्चों की मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा अब से 2 स्तर पर की जाएगी। जिसमें चिकित्सालय एवं समुदाय स्तर पर मृत्यु की समीक्षा होगी। इसके लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। आरसीएचओ डॉक्टर सीपी गोस्वामी ने बताया कि जन्म से 28 दिन तक एवं 29 दिन से 59 माह तक के बच्चों की मृत्यु के कारणों की समीक्षा के लिए सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बच्चों में निमोनिया डायरिया के कारण सर्वाधिक मृत्यु होती है। शिशु में जन्म से 7 दिन के मध्य एवं 7 दिन से 28 दिन के मध्य का समय क्रिटिकल होता है। सभी अभिभावकों को शिशुओं को सर्दी से पूर्ण सुरक्षा करनी चाहिए जिससे कि हाइपोथर्मिया नहीं हो। उधर उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ घनश्याम चावला ने नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई शाहपुरा का निरीक्षण किया गया और प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक जैन को समुचित निर्देश प्रसारित किए गए।

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