मनरेगा: बांधों व नहरों के लिए संजीवनी

35 नहरों के कार्य करवाए गए

By: Suresh Jain

Published: 17 Jun 2020, 04:02 AM IST

भीलवाड़ा।
जल संसाधन विभाग की ओर से तैयार किए गए विभिन्न बांधों की मरम्मत व पौधारोपण मनरेगा से किया जा रहा है। महत्तवपूर्ण बांध मेजा, गोवटा, ओराई, लड़की बांध पर जल संसाधन विभाग के माध्यम से मनरेगा के तहत मरम्मत, सुदृढ़ीकरण, पौधारोपण के साथ नहर निर्माण, मरम्मत व सिल्ट क्लीयरेन्स कार्य करवाए जा रहे हैं। मनरेगा से ग्राम पंचायतों में निर्मित तालाबों से भी नहरें निकालने का कार्य भी किया जा रहा है।
भीलवाड़ा जिला तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई के लिए जाना जाता है। हर पंचायत में छोटे व बड़े तालाब हैं, जो न केवल जल संग्रहण संरचना के रूप में उपयोग लिए जा रहे हैं। तालाबों से खेतों में सिंचाई भी की जाती है। तालाबों से नहरों व धोरों का निर्माण ग्राम पंचायत के माध्यम से करवाया जा रहा है।

केन्द्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 13791 हैक्टेयर क्षेत्र में नहरों से सिंचाई की जा रही है। नहरों की उपयोगिता को देखते हुए मनरेगा के तहत इनकी मरम्मत व निर्माण कार्य किए जा रहे है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपालराम बिरड़ा ने बताया की मनरेगा के तहत गत वर्ष लगभग 135 नहरों के कार्य करवाए गए हैं। बड़े बांधों पर मरम्मत नहरों पर पक्का धोरा निर्माण 58 कार्य हुए हैं।
अधिषाषी अभियंता (मनरेगा) महेशचन्द ओझा ने बताया कि मनरेगा में निर्मित की जा रही सिंचाई नहरें ग्रामीणों के लिए बहुत उपयोगी हैं। तालाब से पिलाई करने के लिए तैयार की गई कच्ची नहरे व धोरे टूटने से जल की बर्बादी होती थी। पिलाई के समय किसान रातभर बैठ कर खेतों की चौकीदारी करते थे। इस प्रकार की विभिन्न समस्याओं का सामना करना होता था। इसी कारण नहरों के कार्य प्रमुखता से करवाए जा रहे हैं।

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०१... पंचायत समिति आसीन्द की पंचायत कटार में बाकडिय़ा तालाब की नहर व पुलिया निर्माण किया गया। तालाब से 300 फीट लम्बाई तक इस नहर का निर्माण करवाया गया। इससे 2 किलोमीटर में खेतो में सिंचाई हो रही है। नहर निर्माण से 50 से 60 किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। मांगीलाल का कहना है कि नहर निर्माण से उनकी दोनों फसलों रबी व खरीफ में सिंचाई हो रही है।
०२... पंचायत समिति आसीन्द की ग्राम पंचायत दांतड़ा में जेठूनाथ के खेत से छोगा जाट के खेत तक धोरा निर्माण करवाया गया। किसान जेठू नाथ के अनुसार पूर्व में धोरा कच्चा होने से बीच में टूट जाता था। इससे पानी व्यर्थ जाता था। और खेत रीते रह जाते थे। अब नहर का निर्माण होने से पानी खेतो तक पंहूच रहा है। इस नहर डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र मे बनाई गई है। इससे 30 हैक्टयर में सिंचाई हो रही है।

Suresh Jain Reporting
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