14 माह के मासूम को कुएं में गिरता देख, मां ने लगाई छलांग, दोनों की मौत

14 माह के मासूम को कुएं में गिरता देख, मां ने लगाई छलांग, दोनों की मौत

tej narayan | Publish: Oct, 13 2018 04:07:41 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 04:10:25 PM (IST) Bhilwara, Rajasthan, India


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जहाजपुर।
रावतखेड़ा गांव में खेत पर बिना मुंडेर वाले कुएं में गिरे 14 माह के बेटे को बचाने के लिए मां ने भी कुएं में छलांग लगा दी। जिससे दोनों की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तथा दोनों के शव को बाहर निकलवाकर जहाजपुर चिकित्सालय में पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों के सुपुर्द किया।

 

 

रावत खेड़ा गांव में खेत पर फसल का कटाई का काम चल रहा था। मां सुमनदेवी फसल कटाई में व्यस्त थी। इस दौरान उसका 14 माह के बेटा विवेक खेलते—खेलते बिना मुंडेर के कुएं में जा गिरा। यह देख उसे बचाने के लिए मां सुमन देवी चिल्लाते हुए दौड़ते दौड़ते कुएं में छलांग लगा दी। जिससे मां बेटे दोनों की मौत हो गई। आसपास खेतों में कार्य कर रहे किसान दौड़ दौड़ कर कुएं तक पहुंचे। पानी में शव देख ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उपाधीक्षक लाखन सिंह मीणा, सहायक उप निरीक्षक महेंद्र सिंह घटनास्थल पर पहुंचे ग्रामीणों की मदद से दोनों शव को बाहर निकालकर जहाजपुर चिकित्सालय की मोर्चरी मैं रखवाया गया जहां दोपहर को पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के सुपुर्द किए।

फसल कटाई में व्यस्त थी मां
शनिवार सुबह आठ बजे सुमन देवी पत्नी मुकेश प्रजापत निवासी रावत खेड़ा अपने 14 माह के पुत्र विवेक को साथ लेकर खेत पर फसल कटाई का कार्य कर रही थी। धूप होने से बच्चे को पास ही छांव में बिठाकर चॉकलेट देकर पुनः फसल कटाई कार्य में व्यस्त हो गई।


धमाके की आवाज सुनकर आई मां

14 वर्षीय विवेक खेलते खेलते बिना मुंडेर वाले कुएं में गिर गया धमाके की आवाज सुनकर पास ही फसल कटाई का कार्य कर रही मां चिल्लाते हुए दौड़ कर आई कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी। जिससे दोनों की मौत हो गई। घटना की जानकारी गांव में आग की तरफ फैल गई। पुलिस व ग्रामीणों ने मिलकर दोनों शव कुएं से बाहर निकाले।

ज्ञान ज्योति के नहीं थम रहे हैं आंसू
मृतका सुमन देवी 2 बच्चों की मां थी सबसे बड़ी 3 वर्षीय पुत्री ज्ञान ज्योति जो घटना के समय अपनी बुआ के साथ घर पर ही थी। जैसे ही मृत भाई वह मां के शव को लेकर घर पहुंचे तो ज्ञान ज्योति की आंखों से अश्रु धारा रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। नन्हीं सी ज्ञान ज्योति का विलाप आप देख हर किसी का कलेजा मुंह को आ रहा था।

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