प्रकृति से बढाएं लगाव

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

By: Suresh Jain

Published: 05 Jun 2020, 10:52 AM IST

भीलवाड़ा।
प्रकृति में विकृति नहीं, संस्कृति लानी है। ऐसी संस्कृति, जो मानवता, इंसानियत और आगामी पीढि़यों के लिए वरदान साबित हो। पर्यावरण की शुद्धता के विषय में लॉकडाउन सकारात्मक कदम साबित हुआ परंतु मनुष्य को काफी कष्ट सहने पड़े। पर्यावरण शुद्ध हुआ। यह बात समझ जाएं कि समय रहते प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ा ले तो यह घाव नहीं छांव देगी। हम प्रकृति को खुद के करीब ले जाएं। प्रकृति की शुद्धता के लिए अनूठा कदम उठाएं। आदतों में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। पर्यावरण के प्रति अनदेखी बड़े खतरे में डाल सकती है। इसका आभास लॉकडाउन में हो चुका है। प्रकृति के प्रति अनुशासित होना पड़ेगा। अनुशासन बाध्यता नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति बंधन के रूप में हो। प्रकृति के प्रति हमें आत्म-अनुशासन, आत्म-संयम, आत्म-विश्लेषण, आत्म-चिंतन, आत्म- संकल्प लेना होगा। बढ़ती जनसंख्या के चलते, प्रदूषण घटाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विशेष निर्णय लेने होंगे। विरासत में बैंक नहीं, अर्थ बैलेंस देकर जाना हैं। इसके लिए विभिन्न उपाय करने होंगे। जैसे जन्मदिन पर तोहफे में पौधा देना या वृक्षारोपण करवाना। शादी में दहेज की जगह 50, 100, 500 या 1000 पौधे लगाने की शपथ लें। पौधों को संतान की तरह संरक्षित करना व प्रेम करना।
डॉ. प्रिया परसोया, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, भीलवाड़ा

Suresh Jain Reporting
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