बजट ही नहीं, बांधों की कैसे बंधे व्यवस्था की पाल

Not only the budget, how is the arrangement of dams tied? भीलवाड़ा जिले में साठ बांधों की मरम्मत की उम्मीदें बजट के इंतजार में सरकारी फाइलों मेंं दबी पड़ी है। ग्रीस एवं आयलिंग तक के लिए पुख्ता बजट नहीं होने से अधिकारी जुगाड़ के जरिए जिले में व्यवस्थाओं की पाल बांधे है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 11 Jun 2021, 10:19 AM IST

भीलवाड़ा। जिले में साठ बांधों की मरम्मत की उम्मीदें बजट के इंतजार में सरकारी फाइलों मेंं दबी पड़ी है। ग्रीस एवं आयलिंग तक के लिए पुख्ता बजट नहीं होने से अधिकारी जुगाड़ के जरिए जिले में व्यवस्थाओं की पाल बांधे है।

जिले के जलसंसाधान विभाग (सिंचाई विभाग) के अधीन करीब साठ छोटे-बड़े बांधे है। इनमें चित्तौडग़ढ़ जिले का सबसे बड़ा मातृकुंडिया बांध भी भीलवाड़ा अधीक्षण अभियंता के अधीन है। जिले में अधिशासी अभियंता प्रथम तिलक राज छाबड़ा व द्वितीय सीएल कोली की टीमें बांधों के रखरखाव की व्यवस्था संभाले हुए है। जिले में मुख्यत: गोवटा, जैतपुरा, मेजा, गुवारड़ी, कोठारी, लड़की, उम्मेदसागर, नाहर सागर, सरेरी, झडोल, मंडोल, कान्याखेड़ी है। इनमेंं मातृकुंडिया बांध के सर्वाधिक 52 गेट है, जबकि अन्य बांधों के दो से लेकर दस गेट है।

15 से खुलेगा कंट्रोल रूम

गुजरात तटीय क्षेत्र में उठे तौकते तूफान का असर प्रदेश में भी नजर आने से भीलवाड़ा जिला भी अलर्ट है। जिले में मानसून ने हालांकि दस्तक नहीं दी, लेकिन तौकते के प्रभाव से गत 15 मई से शुरू हुआ बारिश का दौर रूक-रूक कर जारी है। ऐसे में जिले के बांधों के गेटों की मरम्मत व आयलिंग के लिए जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई। Not only the budget, how is the arrangement of dams tied?

लॉकडाउन में खुलवाया विभाग

प्रदेश में लॉक डाउन लागू होने से जन उपयोगी नहीं होने जलसंसाधन समेत एक दर्जन विभाग बंद है। भीलवाड़ा में बांधों के गेटों की सार संभाल के लिए अधीक्षण अभियंता सतपाल मीणा ने विभाग को लॉक डाउन से मुक्त करने की मांग जिला प्रशासन से की, इस पर जिला प्रशासन ने जलसंसाधन विभाग को मानसून पूर्व की तैयारी के लिए अनुमत कर दिया। विभाग के अधिकारी व तकनीकी कर्मचारी अभी जिले में बांधों की सुध लेने के लिए दौड़ रहे है। वही 15 जून से बाढ़ नियंत्रण कक्ष खोलने की तैयारी कर ली है।

ये होते है काम

प्रत्येक बांध के अत्याधिक बारिश की स्थिति व सिंचाई के लिए पानी छोडऩे के लिए बने गेटों की जांच मानसून पूर्व ही कर ली जाती है। इसके तहत अभी जिले मेंं बांधों के गेटों में ग्रीस ऑयलिंग की जारही है। गेटों से जुड़े उपकरण, रोपवे, लोहे की चेन, लीवर भी देखे जा रहे है। गेटों के आसपास कंटीली झांडियां व अवरोधक भी हटाए जा रहे है।

नहीं मिलता अधिकांशत: बजट

विभागीय मुख्यालय बांधों के गेटों के रखरखाव के लिए कुल दो से चार लाख रुपए तक ही देता है, लेकिन रखरखाव का खर्चा दस रुपए तक आता है। यह विभागीय राशि भी अधिकांशत नहीं मिलती है। ऐसे में कई बार रख रखाव का कार्य सभी बांधों में नहीं हो पाता है, विभाग सिर्फ प्रमुख व बड़े बांधों तक ही सिमट कर रह जाते है। इससे छोटे व मंझोले बांधों पर सिर्फ खाना पूर्ति हो कर रह जाती है।

सरकार से मांग रखा बजट
मानसून पूर्व बांधों के रखरखाव के लिए राज्य सरकार से बजट मांग रखा है, जिले में सभी बांधों के गेटों की सार संभाल की जा रही है, लॉक डाउन में जिला प्रशासन से विशेष अनुमति लेकर विभाग खुलवा रखे है। जिले में विभाग के अधीन सभी बांध सुरक्षित है।

- सतपाल मीणा, अधीक्षण अभियंता जलसंसाधन विभाग, भीलवाड़ा

Narendra Kumar Verma Reporting
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