बारातियों को नहीं भायी रोडवेज बसें, सावों में केवल एक बुकिंग

सावे शुरू होने के साथ ही रोडवेज में घाटे की भरपाई करने की आस जगी थी

By: tej narayan

Updated: 25 Apr 2018, 01:35 PM IST

भीलवाड़ा।

सावे शुरू होने के साथ ही रोडवेज में घाटे की भरपाई करने की आस जगी थी। सावों में बुक होने वाली बसों से लाखों रुपए की आय का सपना अधिकारियों ने जागते हुए देख लिया। लेकिन यह सपना पूरा नही हो पा रहा है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों की हालत इतनी खराब है कि सावों के सीजन के बावजूद रोडवेज की बसें बुक नही हो रही है।

 

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उपभोक्ता बसों की हालात देखकर ही लौट रहे हैं। रोडवेज में सुपर डिलक्स व डिलक्स बसें नही होना भी बुकिंग नही होने का बड़ा कारण है। बसें बुक करने से होने वाली आय रूट पर चलाने से काफी ज्यादा होती है। 40 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से प्रत्येक बस कम से कम 15 हजार रुपए लेकर आती है, जबकि रूट पर चलाने से केवल 5-7 हजार रुपए की ही आय होती है। भीलवाड़ा में आखातीज पर एक बस बुक हुई इसके बाद अभी तक एक भी बस बुक नही हुई।

 

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29 अप्रेल को पीपल पूर्णिमा पर अबुझ सावे है लेकिन उसके लिए भी अब तक एक भी बस बुक नही हुई है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में सावों के चलते दर्जनों बसें बुक हो रही है। अकेले अलवर जिले में पीपल पूर्णिमा के सावे को लेकर 50 बसें 20 अप्रेल तक बुक हो गई। अधिकारियों का कहना है कि भीलवाड़ा आगार की बसें पुरानी होने के चलते भी उपभोक्ताओं को रास नही आ रही है। तीन साल पहले नई बसें आई थी। बसों की हालत सही नहीं होने के साथ ही रोडवेज में सुपर डीलक्स व डीलक्स बसें नहीं होने से भी उपभोक्ता रोडवेज बसों की ओर आकर्षित नहीं होते हैं।

जो नई बसें हैं वो अनुबन्धित होने के कारण बुक नहीं की जा सकती है। दूसरा प्रमुख कारण अगर कोई बुकिंग भी कराना चाहता है तो किराया ज्यादा होने से बुक नहीं कराता है। इसके अलावा भीलवाड़ा में निजी बसें भी पर्याप्त होने से उपभोक्ता निजी बसों को बुक करा लेते हैं। भीलवाड़ा में बसों की हालत खस्ता होने से गर्मी के कारण खाली चल रही बसों से हो रहे घाटे की भरपाई का एक मात्र चारा निगम के पास बचा था उस पर भी पानी फिर गया।

 

निजी बसों की संख्या ज्यादा होना वजह
यहां बुकिंग कम होने का सबसे बड़ा कारण निजी ट्रावेल्सों का बड़ी संख्या में होना है। निजी बस संचालक उपभोक्ताओं को सुपर डीलक्स व डीलक्स बस उपलब्ध करा देते हैं। रोडवेज की एेसी बसें लम्बे रूट पर चलती है और यहां उपलब्ध भी नहीं है। रोडवेज का किराया भी ज्यादा है।।
सुंधाशु राय नागोरी, मुख्य प्रबंधक भीलवाड़ा आगार

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