सारभूत हो हमारी वाणी-आचार्य महाश्रमण

पर्युषण का चतुर्थ दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया

By: Suresh Jain

Published: 07 Sep 2021, 08:45 PM IST

भीलवाड़ा।
पर्युषण का चतुर्थ दिन आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। आचार्य ने कहा कि हमारी वाणी में अमृत है तो विष भी है। व्यक्ति को कभी अयथार्थ भाषा नहीं कहनी चाहिए। बोलो तो निर्दोष भाषा बोलो, विचार पूर्वक बोलो। कई बार बोलते व्यक्ति बात को लंबा खींचता है वह एक प्रकार की वाचालता है। हमारी वाणी मित होनी चाहिए। निरर्थक कोई बात न कहे। परिस्थिति देखकर वाणी का प्रयोग होना चाहिए। बोलना बड़ी बात नहीं है। न बोलना भी बड़ी बात नहीं है परंतु बोलने न बोलने का विवेक रखना बड़ी बात है।
साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि हमारी वाणी को तोलना जरूरी है। पहले सोचे फिर बोले और बोलने के बाद तोले। हमारी वचन शक्ति का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। बिना विचारे बोलना कई बार अनर्थ को आमंत्रित करने वाला बन जाता है। मुनि महावीर कुमार, मुनि जयेश कुमार, साध्वी विश्रुतविभा, संबुद्धयशा, तितिक्षाश्री ने विचार व्यक्त किए।

Suresh Jain Reporting
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