पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग, सरकारी महकमों की गाडि़यों के धुएं ने भी गड़बड़ाया बजट

पेट्रोल और डीजल के आसमान छूते दामों ने आग लगा रखी है। आमजन की जेब पर कैंची चल रही है। पेट्रोल ने शतक लगा दिया और डीजल लगभग सौ के करीब पहुंचने को आतुर है। इससे आमजन ही नहीं सरकारी कारिंदें भी बढ़ती कीमतों से अछूते नहीं है। कोरोना महामारी ने पहले से ही सरकारी विभागों के बजट पर ब्रेक लगा रखा है।

By: Akash Mathur

Published: 20 Jun 2021, 10:27 AM IST

भीलवाड़ा. पेट्रोल और डीजल के आसमान छूते दामों ने आग लगा रखी है। आमजन की जेब पर कैंची चल रही है। पेट्रोल ने शतक लगा दिया और डीजल लगभग सौ के करीब पहुंचने को आतुर है। इससे आमजन ही नहीं सरकारी कारिंदें भी बढ़ती कीमतों से अछूते नहीं है। कोरोना महामारी ने पहले से ही सरकारी विभागों के बजट पर ब्रेक लगा रखा है। उसके ऊपर डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी के कारण सरकारी विभागों का बजट गड़बड़ा गया है। राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार को बढ़ती कीमतों के बाद सरकारी विभागों पर आए असर की पड़ताल की तो सामने आया कि हर विभाग में दो लाख से साढ़े चार लाख रुपए तक का डीजल खर्चा बढ़ गया है। जबकि सरकार की आेर से बढ़ोत्तरी के बाद खर्चे का बजट नहीं बढ़ाया गया। इससे सरकारी अधिकारी से लेकर कर्मचारी गड़बड़ाढ बजट के कारण वाहनों का धुआं उड़ाने से पहले सोच रहे है। इस समय पेट्रोल एक लीटर १०३ रुपए के करीब है तो डीजल ९६ रुपए को पार गया।
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रोडवेज ने किराए धेला भी नहीं बढ़ाया, हर माह साढ़े चार लाख का फटका
डीजल के दामों में सबसे ज्यादा फर्क रोडवेज को पड़ा है। पहले से राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम घाटे से जूझ रहा है। उसके ऊपर अकेले भीलवाड़ा आगार को हर माह डीजल में बढ़ोत्तरी के कारण साढ़े चार लाख रुपए का अतिरिक्त नुकसान शुरू हो गया है। कहने को सरकार रोडवेज को डीजल में सब्सिडी देती है। लेकिन दाम बढ़ाकर आग में घी का काम कर दिया है। मई माह में रोडवेज को ७६.६१ रुपए प्रति लीटर डीजल उपलब्ध हो रहा था। जून में यह ७९ रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। भीलवाड़ा आगार को सामान्य रूप से रोजाना के निर्धारित शड्यूल को चलाने के लिए ५००० से ८००० डीजल कर जरूरत होती है। कोरोना महामारी के बाद इस समय ४००० से ४५०० लीटर डीजल की जरूरत पड़ रही है। यानि रोजाना १४ हजार रुपए अतिरिक्त नुकसान हो रहा। जो कि महीने में नुकसान साढे़ चार लाख तक पहुंच रहा। जबकि रोडवेज ने किराए के नाम पर एक रुपए भी नहीं बढ़ाया है।

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गांठ से डीजल भरवाने को मजबूर थानेदार, पुलिस को भी ढाई लाख का नुकसान

पुलिस महकमे को भी डीजल में बढ़ोत्तरी से चोट लगी है। सरकार की ओर से अलग से बजट नहीं बढ़ाया गया है। इस समय भीलवाड़ा जिले में कुल ६० गाडि़यां पुलिस महकमे के पास है। हर थाने को हर माह दो सौ लीटर डीजल दिया जाता है। इससे ज्यादा जलाने पर थानेदार को गांठ से जलाना पड़ता है। सरकार की ओर से पुलिस को डीजल का बजट निर्धारित है। लेकिन दाम बढऩे के बाद अकेले भीलवाड़ा पुलिस का बजट करीब ढाई लाख रुपए बढ़ गया है। जबकि पुलिस के काम में कोई कमी नहीं आई है।

Akash Mathur
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