दो जवानों को खोने के बाद हाइवे पर पुलिस सख्त

Police strict on the highway after losing two soldiers काला सोना यानी अफीम के काले कारोबार के देश के विभिन्न हिस्सों में जुड़ते तारों एवं हाईवे पर कड़ी होती नाकाबंदी के बाद तस्करों ने न सिर्फ अपनी रणनीति बदली है, बल्कि 'तू डाल-डाल, मैं पात-पातÓ की कहावत को भी चरितार्थ कर दिया है। report narendra verma

By: Narendra Kumar Verma

Published: 18 Sep 2021, 12:55 PM IST

भीलवाड़ा। काला सोना यानी अफीम के काले कारोबार के देश के विभिन्न हिस्सों में जुड़ते तारों एवं हाईवे पर कड़ी होती नाकाबंदी के बाद तस्करों ने न सिर्फ अपनी रणनीति बदली है, बल्कि 'तू डाल-डाल, मैं पात-पातÓ की कहावत को भी चरितार्थ कर दिया है। Police strict on the highway after losing two soldiers

दरअसल, मध्यप्रदेश व चित्तौडग़ढ़ से गुजरात, मुंबई, पंजाब व हरियाणा की राह नापने वाले तस्कर सड़कों पर पुलिस की कड़ी नाकेबंदी और आक्रामक रुख को देखते हुए हाईवे छोड़ कर गांवों की राह पकडऩे लगे हैं। तस्कर राजसमंद व उदयपुर से नागौर के नए रास्ते भी तलाशने लगे हैं।

गांवों की राह पर पांच माह पूर्व एक ही रात में दो स्थानों पर पुलिस व तस्करों के बीच हुई मुठभेड़ में दो पुलिस जवानों के शहीद होने के बाद मानों पुलिस भी नींद से जागी हो। उसने अपना रुख कड़ा करते हुए न सिर्फ तस्करों पर शिकंजा कसा है, बल्कि अपने तंत्र में मौजूद तस्करों के मददगारों की पहचान भी तेज कर दी है। पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप भी है और वे अपनी रणनीति बदलने पर भी मजबूर हो गए हैं।

शहीद हुए पुलिस जवान, तब चेता महकमा
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश एवं चित्तौडग़ढ़ व प्रतापगढ़ जिले के अफीम उत्पादन का बड़ा केन्द्र होने एवं भीलवाड़ा जिले में भी अफीम की काश्त होने से तस्करों की निगाहें मेवाड़ पर लगी हुई हैं। जिले में कोरोना संकट काल में हाईवे पर की गई नाकाबंदी असरकारक रही। तस्करी पर अंकुश लगा, लेकिन कई शातिर तस्कर हाईवे छोड़ कर गांवों की पगडंडियों को तलाशने लगे। गत १० अप्रेल की रात को कोटड़ी व रायला थाना क्षेत्र में पुलिस जवानों ने तस्करों को ललकारा, लेकिन तस्करों के अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने के चलते उनके हमले में जिला पुलिस के दो जवान शहीद हो गए। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस का रुख आक्रमक हो गया। तस्करों को शरण देने वाले छह पुलिस कर्मियों को जून माह में पुलिस सेवा से ही बर्खास्त कर दिया गया, जबकि एक दर्जन तस्कर व गैंगस्टर पुलिस की गिरफ्त में हैं।

जोधपुर व नागौर के तस्कर चढ़े हत्थे
पुलिस के आंकड़े बताते है कि जिले में 1 अप्रेल 2020 से 31 अगस्त 21 के बीच तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत २७ कार्रवाई हुई। इनमें 9 शातिर तस्कर गांवों के रास्ते ही पकड़े गए हैं। गत 22 मार्च को गुलाबपुरा में पुलिस ने ट्रक से 2400 किलो डोडा पकड़ा, मंगरोप में भी अफीम तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़े। बनेड़ा थाना क्षेत्र में तो गत 15 जून को तस्करों ने फिर नाकाबंदी तोड़ी, लेकिन पुलिस जाप्ते ने तस्करों के पिस्तौल ताने जाने के बावजूद हिम्मत दिखाई, नागौर के तीन तस्करों को 25 लाख के डोडे के साथ पकड़ा।

गांवों की पुलिस अब भी कमजोर
जिले में तस्करों के खिलाफ पुलिस को नफरी की कमी एवं संसाधनों के संकट से जूझना पड़ रहा है। तस्करों के साथ १० अप्रेल को हुई मुठभेड़ में भी अत्याधुनिक हथियारों की कमी से दो जवान को जान गंवानी पड़ी। ग्रामीण थानों की पुलिस के पास अब भी पुराने वाहन एवं पुराने हथियार ही हैं, जबकि बदले हालात में अब गांवों की पुलिस को ही तस्करों से अधिक जूझना पड़ रहा है।

जून में ही सबक सिखा दिया खाकी में छिपे अपराधियों को

पुलिस की कड़ी कार्रवाई से तस्कर अब राह बदलने लगे हंै, पुलिस वर्दी में छिपे अपराधियों को भी दबोचा जा रहा है। गत १५ जून तक छह पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है। इस कार्रवाई से अब पुलिस की आंतरिक ताकत भी मजबूत हुई है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छिपे सात शातिर तस्करों को दबोचा जा चुका है। राज्य सरकार भी अब पुलिस जाप्ते को बुलटप्रूफ जैकेट, अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध करवा रही है। नफरी का संकट भी दूर होगा।

- विकास शर्मा, जिला पुलिस अधीक्षक, भीलवाड़ा

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