ढाई हजार का रेमडेसिविर, चालीस हजार तक बेच रहे है

भीलवाड़ा शहर में बजरी के बाद अब ड्रग माफिया ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी अपना जाल बिछा दिया है। मुम्बई, दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत तक के तार जिले से जुड़ गए है। जिन्दगी मौत से जुझते रोगियों को बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत का भय दिखा कर अब 25 से 40 हजार रुपए तक की कीमतें वसूल की जा रही है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 05 May 2021, 11:57 AM IST


भीलवाड़ा. शहर में बजरी के बाद अब ड्रग माफिया ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी अपना जाल बिछा दिया है। मुम्बई, दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत तक के तार जिले से जुड़ गए है। जिन्दगी मौत से जुझते रोगियों को बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत का भय दिखा कर अब 25 से 40 हजार रुपए तक की कीमतें वसूल की जा रही है। लाचार व बेबस परिजन अपनों की जिन्दगी बचाने के लिए यह कीमत चूका भी रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग शिकायतें नहीं मिलने की दुहाई दे कर चुप्पी साधे है। सरकारी कोटे से यह इंजेक्शन ढाई हजार रुपए तक में निजी चिकित्सालयों को मिल रहा है।


कोरोना की दूसरी लहर के घातक होने से शहर एवं जिले में रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, वही मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। एमजी चिकित्सालय से लेकर निजी चिकित्सालयों में रोगियोंं को भर्ती होने के लिए बेड नहीं मिल रहे है। कई लोग अपनों को बचाने के लिए निजी चिकित्सालयों में मांग के अनुरूप मोटा बिल भी चुका रहे है, इसके बावजूद उनकी जिन्दगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल रही है।

जीवनरक्षक दवा का हौव्वा
शहर के कई निजी चिकित्सालयों में तो रेमडेसिविर इंजेक्शन के जीवनरक्षक दवा होने का हौव्वा बना हुआ है। रोगियों के परिजन बता रहे है कि चिकित्सक कह रहे है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन ले आओ इससे रोगी की जान बचाई जा सकती है, लेकिन यह रेमडेसिविर इंजेक्शन सरकारी कोटे के अलावा कही भी उपलब्ध नहीं है।


चिकित्सक बोले, हमारे पर दबाव है

रेमडेसिविर इंजेक्शन लिखने वाले चिकित्सक भी यह नहीं बता पा रहे है कि यह रेमडेसिविर इंजेक्शन कहा मिलेगा, लेकिन चिकित्सालयों में या आसपास के क्षेत्रों में लपका गिरोह पनपा हुआ है, जिसके तारे ड्रग माफिया से जुड़े हुए है। यह लोग मनमाना दाम वसूल कर रेमडेसिविर इंजेक्शन दे रहे है। दूसरी तरफ चिकित्सकों का कहना है कि वह रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लिख रहे है, परिजन ही उन पर लिखने का दबाव बना रहे है, वह कहते है कि आप तो लिख दो हम कही से भी मंगवा लेंगे।


केस नम्बर: एक

पीडित राकेश बदला हुआ नाम ने बताया कि उनके पिता यहां एक निजी चिकित्सालय में भर्ती है, चिकित्सक ने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन जरुरी है, लेकिन चिकित्सालय में यह इंजेक्शन नहीं है। काफी प्रयास किए तो एक व्यक्ति ने यह इंजेक्शन दिलवा दिया, उसकी कीमत 25 हजार रुपए चुकाई। अभी दो इंजेक्शन और चाहिए।

केस नम्बर: दो
रिटायर्ड पुलिस कर्मी की निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई, चिकित्सक ने उपचार के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत बताई थी, उनकी पुत्री ने चिकित्सालय में इंजेक्शन नहीं मिलने पर कालाबाजारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे और लगवाए भी


केस नम्बर: तीन

करण सिंह बदला हुआ ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कई जगह भटका, कही नहीं मिला, सम्पर्क सूत्र के जरिए कुछ लोग उसे रेमडेसिविर इंजेक्शन देने को राजी हुए, दक्षिण से मंगवाने में काफी खर्चा बताया, एक रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 30 हजार तक बताई।

दक्षिण से भी आ रहे है
शहर में अभी गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली व दक्षिण भारत के हिस्सों से रेमडेसिविर इंजेक्शन पहुंच रहा है। यह इंजेक्शन मुख्यत: वीडियो कोच बसें व ट्रेन के जरिए मंगाया जा रहा है, इसमें रेलवे की पार्सल सुविधा के बजाए संबधित व्यक्ति अपने दलाल के जरिए यह इंजेक्शन मंगावा रहा है। कीमत एक इंजेक्शन पन्द्रह से 40 हजार रुपए तक वसूली जा रही है।


चिकित्सक अनावश्यक रूप से ना लिखे

रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपयोगिता सभी राेिगयों के लिए नहीं होती है, कोरोना संक्रमण की पुष्टि के सात दिन के भीतर ही यह रेमडेसिविर इंजेक्शन रोगियों के लिए असरकारक है। सिटी चेस्ट स्कोर व ऑक्सीजन लेबल चिंता जनक है, वही इसका उपयोग करें । इस संदर्भ में निजी चिकित्सालयों को निर्देशित किया गया कि वह अत्याधिक जरूरत में ही इंजेक्शन लिखे, रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग की जरूरत नहीं होने के बावजूद उसे लगवाने पर साइड इफेक्ट भी है और शुगर का खतरा बढ़ सकता है। राज्य सरकार की तरफ से मिल रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन के वितरण के लिए जिला स्तरीय कमेटी भी गठित हे। कालाबाजारी की शिकायतें अभी तक तो नहीं मिली है, आई तो जांच होगी।

शिव प्रसाद नकाते, जिला कलक्टर, भीलवाड़ा

Narendra Kumar Verma Reporting
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