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शाबास-कुलदीप, तीन साल में 2104 रेस्क्यू

Shabas-Kuldeep, 2104 rescues in three years जान हथेली पर खेल कर आम जीवन को सुरक्षित रखने के साथ ही वन्य जीवों की जान सांसत से बाहर निकालने के लिए भीलवाड़ा के सुभाषनगर निवासी वन जीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत सब कुछ दांव पर लगाए हुए। महज 3 साल में राणावत 2104 वन्य जीवों व जहरीलें जीवों का रेस्क्यू कर चुके है।

भीलवाड़ा

Published: November 08, 2021 11:15:32 pm


भीलवाड़ा। जान हथेली पर खेल कर आम जीवन को सुरक्षित रखने के साथ ही वन्य जीवों की जान सांसत से बाहर निकालने के लिए भीलवाड़ा के सुभाषनगर निवासी वन जीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत सब कुछ दांव पर लगाए हुए। महज 3 साल में राणावत 2104 वन्य जीवों व जहरीलें जीवों का रेस्क्यू कर चुके है। हाल ही एक नवम्बर को उन्होंने एक ही दिन में रिकार्ड 21 रेस्क्यू किए है। कुलदीप की पीड़ा है कि वन्य जीव सुरक्षा एवं लोगों की सुरक्षा के लिए चौबीस घंटे काम करने के बावजूद उन्हें सरकारी स्तर पर प्रतिफल नहीं मिल पा रहा है। वन विभाग उसकी आजीविका का संबल दे तो परिवार को पालन पोषण भी यथा तरीके से हो सके। Shabas-Kuldeep, 2104 rescues in three years at bhilwara
Shabas-Kuldeep, 2104 rescues in three years
Shabas-Kuldeep, 2104 rescues in three years

राणावत बताते है कि जहरीली व वन्य जीव मौसम में बदलाव से जंगल छोड़ कर आबादी क्षेत्र में आ रहे है। इनमें से जहरीली कोबरा प्रजाति के सांप भी शामिल है, जोकि घरों, गोदाम व प्रतिष्ठानों में जगह तलाश रहे है। ऐसे में घरों में घुस आने से परिजनों के साथ क्षेत्र के लोग भी दहशत में आ रहे है। इन्हें दहशत मुक्त करने के लिए वह कई रातों को सोए तक नहीं है। वह बताते है कि वह तीन साल में कुल 2104 रेस्क्यू कर चुके है। एक साल में उनकी छुट्टी महज दुर्गाष्टमी के हर दिन रही है।
पांच पैंथर को भी बचाया

वह बताते है कि तीन साल में अभी तक पांच पैंथर, दो मगरमच्छ, सात सियार, चार बिज्जू, आठ रोजड़े व दो लोमड़ी का भी रेस्क्यू कर चुके है। वह बताते है कि रेस्क्यू के दौरान उन्हें किसी प्रकार प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल सकी, आने जाने के साधन भी उसे व्यक्तिगत स्तर पर जुटाने पड़े है।
शहर से लेकर गांव तक रेस्क्यू
वह शहर की सभी आवासीय कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों व कई दुकानों में रेस्क्यू कर सांप, अजगर को जिंदा पकड़ चुके है। इसके लिए उन्होंने देर रात की भी परवाह नहीं की। इसी प्रकार करेड़ा क्षेत्र में भी हिंसक जीव के आबादी में घुस आने पर वो रेस्क्यू के लिए पहुंचे है। । रेस्कयू के दौरान जहरीले जीवों ने भी कई बार हमला कर क्षति पहुंचाने की कोशिश की है। दूसरी तरफ कोरोना से डरे शहर में रेस्क्यू के दौरान क्षेत्र के लोगों ने कुलदीप की तालिया बजा कर हौसला अफजाई भी की है। वह १०० से अधिक सांपों की प्रजातियों का रेस्क्यू कर चुके है।
अजगर नील गाय को लील गया

उपनगर पुर में पुर पातोला महादेव के पास खेत में अक्टूबर माह में 12 फीट लम्बे 40 किलो वजनी अजगर ने नीलगाय के बच्चे को निगल लिया। घटना में बच्चे की तो मौत हो गई। लेकिन कुलदीप ने मौके पर पहुंच कर अजगर जो कि इंडियन रॉक पाइथन प्रजाति का था, उसे पकड़ कर सुरक्षित तरीके से वन्य जीव क्षेत्र में छोड़ा।
एक ही दिन में २१ रेस्क्यू
एक नवम्बर को कुलदीप ने सुबह से लेकर देर रात तक भीलवाड़ा शहरी क्षेत्र में घरों व ऑफि स में 21 सांपो का सुरक्षित रेस्क्यू किया। वन विभाग के उपवन संरक्षक देवेन्द्र प्रताप जागावत के दिशा निर्देश अनुसार पुन: वन क्षेत्र में यह जहरीले जीव सुरक्षित छोडे गए।

350 तरह के सांपों की प्रजातियां

माणिक्य लाल वर्मा राजकीय महाविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल त्रिपाठी के अनुसार राजस्थान में 350 तरह के सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं। आमतौर पर यहां 27 तरह की ऐसी प्रजातियां है जो कभी भी देखने को मिल जाती हैं जहरीले सांप की अगर बात करें तो 4 तरह की प्रजातियां राजस्थान में मिलती हैं जिनमें कोबरा, वाइपर, रसेल वाइपर मुख्यत: शामिल है।

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