पूर्णिमा के साथ श्राद्ध शुरू

पितृपक्ष का श्राद्ध आज से

By: Suresh Jain

Published: 02 Sep 2020, 02:02 AM IST

भीलवाड़ा .

हिंदुओं में व्यक्ति के गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक अनेक प्रकार के संस्कार किए जाते हैं। उसके बाद अपने पितृों के लिए श्राद्ध करने का दायित्व उनके परिजनों का होता है। वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को पितृों की पुण्य तिथि पर श्राद्ध कर्म किया जाता है। लेकिन भाद्रपद की पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध का विधान है। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध पक्ष कहते हैं। यह श्राद्ध ऐसे तो बुधवार से शुरू होंगे। लेकिन मंगलवार को सुबह साढ़े नौ बजे बाद से पूर्णिमा शुरू होने के साथ ही श्राद्ध भी शुरू हो गए है। पंडित अशोक व्यास ने बताया कि ग्रंथों के अनुसार देवपूजा से पहले व्यक्ति को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए। पितृों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं।
व्यास ने बताया कि मंगलवार को श्राद्ध शुरू होते ही पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं इसलिए जिस दिन उनकी तिथि होती है उससे एक दिन पहले संध्या समय में दरवाजे के दोनों ओर जल दिया जाता है जिसका अर्थ है कि आप अपने पितर को निमंत्रण दे रहे हैं और अगले दिन जब ब्राह्मण को उनके नाम का भोजन कराया जाता है तो उसका सूक्ष्म रुप पितरों तक भी पहुंचता है। मान्यता है कि कौवा आपका संदेश पितरों तक पहुंचाने का काम करता है। भोजन में खीर का महत्व है इसलिए खीर बनानी आवश्यक है। भोजन से पहले ब्राह्मण संकल्प भी करता है। श्राद्ध शुरू होने के साथ ही लोगों ने पूर्णिमा पर अपने-अपने घरों में धूप लगाई। श्राद्ध १७ सितम्बर को अमावस्या तक चलेंगे।

Suresh Jain Reporting
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