हैंक यार्न आब्लिगेशन: स्पिनिंग मिलों को मिली बड़ी राहत

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By: rajesh jain

Published: 10 Mar 2019, 01:00 AM IST


भीलवाड़ा।

 

केन्द्र सरकार ने स्पिनिंग मिलों को हैंक यार्न आब्लिगेशन में बड़ी राहत दी है। अब मिलों को कुल उत्पादन का ३० प्रतिशत ही हैंक यार्न तैयार करना होगा। पहले 40 प्रतिशत यार्न उत्पादन करना पड़ता था। एेसा नहीं होने पर मिल संचालकों को किसी अन्य से खरीदकर हैंडलूम उद्योग को सप्लाई करना पड़ता था।

 

क्या है हैंक यार्न आब्लिीगेशन

 

स्पिनिंग मिलों में दो तरह के यार्न का उत्पादन होता है। पहलो कोण के रूप में। इसे बोरे में पैक किया जाता है। दूसरा आंटी (हैंक) यार्न बनाकर गांठों में पैक किया जाता है। कोण पावरलूम उद्योग व हैंक यार्न आब्लिगेशन हैंडलूम उद्योग में काम आता है। हैंडलूम उद्योग के लिए यार्न की कमी नहीं हो, इसे देखते हुए टेक्सटाइल मंत्रालय ने उत्पादित यार्न का 40 प्रतिशत हैंक यार्न के रूप में पैक करने के आदेश दे रखे थे।

 

घटकर 23.77 लाख रह गए हैंडलूम

 

80 के दशक तक देश में करीब ४५ लाख हैंडलूम उद्योग थे। इनमें एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता था। वर्ष 2017 में हुए सर्वे के अनुसार हैंडलूम की संख्या 23.77 लाख रह गई। पावरलूम उद्योग 15 लाख से 25 लाख हो गए। हैंडलूम उद्योग कम होने से हैंक यार्न की मांग भी कम होने लगी। राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन तथा मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स लगातार हैंक यार्न उत्पादन की सीमा घटाने की मांग कर रहे थे। चैम्बर के महासचिव आरके जैन ने बताया कि इस आदेश से राहत मिली है।

 

लगा ली वार्पिंग मशीन

 

हैंडलूम उद्योग में आंटी को खोलकर उसे छोटे-छोटे कोण बनाने के लिए वार्पिंग मशीन लगाने लगे। इस प्रोसेस से यार्न काफी उलझ जाता है या ५ प्रतिशत यार्न खराब हो जाता जाता है। इसके चलते हैंडलूम उद्यमी कोण यार्न का इस्तेमाल करने लगे हैं।

 

राजस्थान में 40 मिलें

 

प्रदेश में करीब 40 स्पिनिंग मिले हैं। इनमें 18 भीलवाड़ा में हैं। इनमें प्रतिवर्ष करीब चार लाख टन यार्न का उत्पादन होता है। भीलवाड़ा में 2.80 लाख टन सभी तरह के यार्न का उत्पादन होता है। इसमें से 40 प्रतिशत हैंक यार्न बनाया जाता है। पहले सहकारी को-ऑपरेटिव मिलें, भीलवाड़ा स्पिनर्स तथा मेवाड़ टेक्सटाइल मिल यह यार्न बनाती थी। अब तीनों मिलें बन्द हो चुकी हैं। हैंक यार्न से बाड़मेर, जैसलमेर, भीलवाड़ा के सांगानेर, हलेड़, ईंरास, गंगापुर, आसीन्द तथा शाहपुरा में काम होता था। अब केवल शाहपुरा में ही हैंडलूम का काम हो रहा है।

 

फैक्ट फाइल


- 23.77 लाख हैण्डलूम देश में

-43 लाख लोगों को रोजगार
- 40 मिलें हैं प्रदेश में

- 4 लाख टन यार्न प्रतिवर्ष उत्पादन
- 18 मिलें भीलवाड़ा में

- 2.80 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन भीलवाड़ा में

- 15 कपड़ा हैंडलूम का होता है निर्यात

- 95 प्रतिशत हैंडलूम कपड़ा भारत में बनता है

 

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