अब भी बहुत कुछ बाकी महात्मा गांधी अस्पताल में

अधिकांश विभागों में हो गई डॉक्टरों की भरपाई
ऑर्थोपेडिक व सर्जरी विभाग में हो रहे जटिल ऑपरेशन
अब भी कई विभागों के विशेषज्ञों की है दरकार

By: Suresh Jain

Published: 01 Jul 2019, 12:34 PM IST

भीलवाड़ा।
वर्षों से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे महात्मा गांधी चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज से जुडऩे के बाद रूप बदल गया है। मेडिकल कॉलेज के ४७ चिकित्सक मिलने के बाद अब कुल ११२ चिकित्सक हो गए हैं। इससे मरीजों को राहत मिली है। नर्सिंगकर्मियों की संख्या भी ७७ से बढ़कर १६२ हो गई। एक साल पहले आउटडोर में मरीजों को चिकित्सक मुश्किल था। अब मरीजों को बराबर सेवाएं मिलने लगी हैं। अस्पताल के वार्डों में भी कुल ५०० बेड हो गए हैं। वार्डों में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी सेवाएं रहे हैं। पहले चिकित्सकों का समय वार्ड में ही पूरा हो जाता था। अब इनके आउटडोर में भी बैठने से रोगियों को काफी राहत मिली है। यहां जटिल ऑपरेशन भी होने लगे हैं। हड्डियों के सभी तरह के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। रोगियों के लिए सर्जिकल आइसीयू, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड भी चालू है।
ये हैं कमियां
अस्पताल में अब भी कुछ कमियां हैं। कैंसर रोगियों को परामर्श देने के लिए एनकॉलोजिस्ट नहीं है। न्यूरोलोजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट, नेफ्रोलोजिस्ट, कॉर्डियोलोजिस्ट, गेस्ट्रोलोजिस्ट, एंडोक्राइनोलोजिस्ट नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। मेडिकल कॉलेज का दूसरा सत्र शुरू होने के बाद इन चिकित्सकों के आने की भी संभावना है। फिलहाल ऑबर्जवेशन वार्ड भी नहीं है।
गर्भवती महिलाओं को विशेष राहत
मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में एक साल पहले गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता था। समय पर चिकित्सक नहीं मिलते थे। अब मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक आने के बाद समय पर चिकित्सा परामर्श मिल पा रहा है। आउटडोर में तीन से चार चिकित्सक बैठते हैं।
टेलीमेडिसिन से विशेषज्ञों की सेवाएं
मरीजों को सुपर स्पेशियलिस्ट चिकित्सकों की सेवाओं की आवश्यकता होने पर जयपुर, उदयपुर व अहमदाबाद जाने की जरूरत नहीं है। अस्पताल में ही चिकित्सक टेलीमेडिसिन के जरिए सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर के सुपर स्पेशियलिस्ट चिकित्सकों की सेवाएं मिल रही हैं। मरीज सीधे चिकित्सक से बात कर परामर्श ले रहे हैं।
महंगी जांचें हो रही नि:शुल्क
अस्पताल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क योजना के अलावा कई महंगी जांचें बाहर करानी पड़ती थी। अब ये जांचें आधार कार्ड देखकर अस्पताल में नि:शुल्क की जा रही हैं। थॉयराइड, डेंगू, हिमोफिलिया समेत करीब ३६ प्रकार की जांचें की जा रही हैं। एमआरआइ, डायलिसिस व सीटीस्केन जांच पीपीपी मोड पर हो रही हैं। इको, ईईजी, टीएमटी, ईसीजी, होल्टर आदि जांचें भी हो रही है। लैब में माइक्रोबॉयलोजी, पैथोलोजी, बायोकेमेस्ट्री की आधुनिक मशीनें आ गई हैं।
कैंसर रोगियों को राहत
अस्पताल में कैंसर रोगियों को कीमोथेरैपी दी जा रही है। मरीजों को दवा भी नि:शुल्क मिल रही है। हालांंकि परामर्श के लिए जयपुर जाना पड़ रहा है, लेकिन फॉलो यहां के चिकित्सक कर रहे हैं।
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विभाग व चिकित्सक
मेडिकल विभाग: १५ चिकित्सक
ऑर्थोपेडिक्स विभाग: ४ चिकित्सक
सर्जिकल विभाग: १५ चिकित्सक
नेत्र विभाग: २ चिकित्सक
शिशु रोग विभाग : ७ चिकित्सक
ईएनटी विभाग: २ चिकित्सक
मानसिक रोग विभाग: २ चिकित्सक
चर्म रोग विभाग: २ चिकित्सक
दंत रोग विभाग: ३ चिकित्सक
गायनिक विभाग: ८ चिकित्सक
एनेस्थिसिया विभाग: ७ चिकित्सक
सोनोग्राफी विभाग: ४ चिकित्सक
लैब व ब्लड बैंक: २ चिकित्सक
डायलिसिस: १ चिकित्सक

Suresh Jain Reporting
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