बजरी पर सख्ती तो माफियाओं ने पत्थर का अवैध खनन शुरू किया

रोजाना 500 अधिक अवैध पत्थर के ट्रेक्टर निकल रहे
मंगरोप, कारोई, हमीरगढ़, तख्तपुरा व समोड़ी में हो रहा खनन

By: Suresh Jain

Published: 27 Oct 2020, 10:51 AM IST

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
सर्वोच्च न्यायालय की सख्यतराज्य सरकार बनास व कोठारी नदी से निकले वाली बजरी के पीछे पड़ी है। लेकिन अवैध खनन माफिया बजरी के साथ चुनाई पत्थर का भी अवैध खनन कर रहे है। जिले में करीब पांच दर्जन से अधिक क्षेत्र से चुनाई पत्थर निकालकर बैच रहे है। जबकि जिले में २२ मार्च से ही इनके ठेके निरस्त कर दिए गए है। इसके बाद भी जिले में चुनाई पत्थर का अवैध खनन बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है। इससे सरकार को करोडो़ं रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह अवैध खनन मंगरोप, कारोई, हमीरगढ़, तख्तपुरा व समोड़ी, दरीबा में हो रहा है।
खनिज विभाग की ओर से चैकपोस्ट नाके स्थापित किए जाने के बाद भी चोरी छिपे पत्थर की निकासी कैसे हो पा रही है इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं है। इसके अलावा बिजौलिया में बड़े पैमाने पर सैण्ड स्टोन की अवैध निकासी की जाती है। इसके अलावा खण्डा बोल्डर के रुप में भी यहां अवैध रुप से खनन जारी है। यह अवैध खनन से जिले में लगे क्रेशर प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा मकान निर्माण के काम भी आ रहा है।
२२ मार्च से खण्डित कर दिए ठेके
जिले में जितने भी चुनाई पत्थर के ठेके थे वह २२ मार्च को खण्डित कर दिए थे। इस दौरान कोरोना के कारण दो माह तक के लिए लॉकडाउन लग गया था। उसके बाद खनिज विभाग ने सभी खदानों को अपने अधिन ले लिया था। प्रदेश में करीब ११० ठेके पुन: जारी किए है। इसके लिए पिछले बार की ठेकेराशि को दस प्रतिशत घटाकर पुन: आवेदन मांगे है। जबकि पूर्व के ठेकेदार मात्र दो माह की रॉयल्टी व प्रीमियम राशि माफ करने की मांग कर रहे थे। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। इसके चलते अवैध खनन से सरकार को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हो चुका है।
ऐसे थानों से रहता है खाकी का लगाव
यह भी सच है कि खनन वाले इलाकों के थानों में ही नहीं बल्कि प्रशासनिक तंत्र में पोस्टिंग के लिए सिफारिश चलती है। खनन वाला इलाका होने के साथ ही सुकून भरी ड्यूटी होने से पुलिस कांस्टेबल से लेकर थाना प्रभारी तक के अधिकारी ऐसे थाने के प्रति अधिक आकर्षित रहते है। जानकारों के अनुसार हर बार तबादला सूची निकलने के समय इन थानों पर अपनी तैनाती के लिए बड़ी बड़ी एप्रोच लगती है।
नियमों के अनुसार नहीं होती कार्रवाई
अगर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो नियम है कि खान का पिट मैजरमेंट कराकर खनन किए गए पत्थर और जारी किए गए रवन्ना की गणना कर जांच कराई जाए। खान में विभाग के रिकार्ड और जारी किए गए रवन्ना के हिसाब से कितना खनन किया गया और पिट मैजरमेंट के हिसाब से खनन की गणना कर खान में अधिक मात्रा में किए गए खनन और अवैध खनन की गणना कर संबंधित से वसूली की जानी चाहिए। गणना कर विभागीय दरों से वसूली का प्रावधान है, लेकिन यहां जिले में विभाग सिर्फ खानापूर्ति ही करता है।

Suresh Jain Reporting
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