बड़ा सवाल, आखिर भीलवाड़ा में कैसे हुई कोरोना वायरस की एंट्री

वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में कोरोना वायरस की एंट्री कैसे हुई यह सबके लिए सवाल खड़ा कर रहा है।

भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में कोरोना वायरस की एंट्री कैसे हुई यह सबके लिए सवाल खड़ा कर रहा है। 17 मार्च को बांगड़ अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक व वरिष्ठ फिजीशियनए एक अन्य चिकित्सक व छह नर्सिंगकर्मी अचानक महात्मा गांधी अस्पताल में आकर भर्ती हो जाते हैं। 20 मार्च को आई इनकी रिपोर्ट में चार कोरोना संक्रमित पाए जाते हैं। यह सिलसिला बढ़ता गया और छह दिन में यह रोगी बढ़कर चार 17 हो गए हैं।

सबसे खास बात यह है कि अब तक जो 17 रोगी है इनमें से 15 तो ऐसे हैं जो बांगड़ अस्पताल से ही जुड़े हुए हैं। लेकिन उनमें यह कोरोना कैसे आया इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है। उधर जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग यह खुलासा नहीं कर पा रहा है कि आखिर यह कोरोना वायरस का संक्रमण शहर में आया कैसे।

बड़ा सवाल यह है कि बापूनगर में रहने वाले सुरेन्द्र की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है क्योंकि इनके परिजन इन्हें तीन अस्पतालों में ले गए, लेकिन किसी ने कोरोना क जांच नहीं की। सभी जगह केवल निमोनिया का रोगी मानकर उपचार करते रहे। सूत्रों का कहना है कि बापूनगर निवासी 52 वर्षीय सुरेन्द्र के फेफड़े में परेशानी होने पर उसे उसकी पुत्री जो बृजेश बांगड़ मेमोरियल हॉस्पिटल में कार्यरत है ने अस्पताल में 8 मार्च को भर्ती कराया। उसे आईसीयू में एक दिन भर्ती रखने तथा निमोनिया की शिकायत के आधार पर उपचार देने के बाद उसे अगले दिन 9 मार्च को जयपुर के मेट्रोमैस अस्पताल में दो दिन भर्ती रहा।

वहां के डॉक्टर कार्डियोलॉजिस्ट दिपेन्द्र भटनागर ने इसे एसएमएस अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। लेकिन यह मरीज एसएमएस अस्पताल में न जाकर किसी बिरला अस्पताल में चला गया। वहां दो दिन भर्ती रहने के बाद सुरेन्द्र को भीलवाड़ा लेकर आ गए। लेकिन उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। इसकी जानकारी परिवार के सदस्यों ने चिकित्सा विभाग को और ना ही जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को दी।

उसके बाद उसका अन्तिम संस्कार भी कर दिया गया। खास बात यह रही कि यह संभावित कोरोना के मरीज की किसी ने भी इसकी जांच नहीं करवाई की आखिर इस मरीज में कोरोना के लक्षण है या नहीं। सुरेन्द्र की मृत्यु के बाद ही बांगड़ हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक सहित अन्य नर्सिग स्टॉफ के सदस्य एक.एक करके महात्मा गांधी चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होते गए।

जिला प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं है कि सुरेन्द्र की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है। उधर चिकित्सा विभाग का कहना है कि सुरेन्द्र दिव्यांग व नेत्रहीन था। वह विदेश भी नहीं गया था। जबकि इसकी पुत्री बांगड़ चिकित्सालय में कार्यरत है। इस बारे में उनके परिजन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।

Suresh Jain Reporting
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