अफीम की बुवाई में अब दस आरी के पट्टे में नहीं होगा बंटवारा

अफीम काश्तकार अब दस आरी तक के पट्टे में एक पार्ट मे ही बुवाई कर सकेगा। केन्द्र सरकार के पहली बार यह शर्त लागू करने से संयुक्त परिवार के किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी। नई अफीम नीति के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार मार्फि न की औसत के मुताबिक 6 आरी से 12 आरी तक पट्टे मिलेंगे। नारकोटिक्स विभाग को तोल के दौरान सौंपी अफीम में मार्फि न का औसत 4.2 प्रति हैक्टेयर होने पर ही इसे बार बुवाई का पट्टा मिल सकेगा।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 25 Oct 2020, 12:40 PM IST


भीलवाड़ा। अफीम काश्तकार अब दस आरी तक के पट्टे में एक पार्ट मे ही बुवाई कर सकेगा। केन्द्र सरकार के पहली बार यह शर्त लागू करने से संयुक्त परिवार के किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी। नई अफीम नीति के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार मार्फि न की औसत के मुताबिक 6 आरी से 12 आरी तक पट्टे मिलेंगे। नारकोटिक्स विभाग को तोल के दौरान सौंपी अफीम में मार्फि न का औसत 4.2 प्रति हैक्टेयर होने पर ही इसे बार बुवाई का पट्टा मिल सकेगा।

केन्द्र सरकार ने २१ अक्टूबर को वित्तीय वर्ष २०२०-२१ के लिए नई अफीम नीति घोषित की है। अफीम नीति में आंशिक बदलाव से किसानों के सामने फायदे की स्थिति भी बनी है तो कई परेशानियां भी सामने आएगी। भीलवाड़ा अफीम संभाग में छह तहसील के २६६ गांवों में अफीम की बुवाई होती है। अफीम संभाग में शामिल भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी, मांडलगढ़, जहाजपुर व बिजौलियां तथा चित्तौडग़ढ़ जिले के बेगूं व रावतभाटा के कुल २६६ गांव के ५३९८ काश्तकारों को अभी पट्टा मिला हुआ है। अफीम नीति में हर साल बदलाव के साथ गांव व काश्तकारों की संख्या भी घटती बढ़ती रहती है।
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6 आरी से 12 आरी तक के पट्टे
नई अफीम नीति के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार मार्फि न की औसत के मुताबिक 6 आरी से 12 आरी तक पट्टे मिलेंगे। नारकोटिक्स विभाग को तोल के दौरान सौंपी अफीम में मार्फि न का औसत 4.2 प्रति हैक्टेयर होने पर ही इसे बार बुवाई का पट्टा मिल सकेगा। ४.२ से 5.4 प्रति हैक्टेयर पर 6आरी, 5.4 से 5.9 तक10आरी तथा 5.9 से ऊपर वालों को 12 आरी का लाइसेंस दिया जाएगा। नए पट्टे वाले को 5 आरी मिलेगी, इनमें नए पट्टे वो होंगे, जिन्होंने 1999 से लेकर अप्रेल २०२० तक किसी कारण से पट्टा मिला लेकिन बुवाई नहीं कर सका, इसमें नामांतरण घोषित का ही होगा।
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विभागीय दांवपेच का सामना करना पड़ेगा
अभी तक दस आरी के पट्टे में कई किसान अपनी सुविधा के अनुसार दो हिस्से में बुवाई करता आ रहा था, लेकिन अब दस आरी तक में किसान को एक ही पार्ट में बुवाई करनी होगी। ऐसे में अफ ीम काश्त में एक से अधिक बटाई दार होने पर विवाद की संभावना बनेगी। इतना ही नहीं फ सल में रोग या नुकसान होने पर किसान को आंशिक फ सल हंकवाने की स्थिति में भी विभागीय दांवपेच का सामना करना पड़ेगा।
बद्रीलाल तेली, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ, भीलवाड़

Narendra Kumar Verma Reporting
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