कोरोना पर भारी पड़ा आस्था का रंग

स्वीविंग पुल में तो किसी ने कूलर के टब में खड़ी होकर की छठ पूजा
सुबह उदय होते हुए सूर्य को देंगे अघ्र्य

By: Suresh Jain

Published: 20 Nov 2020, 10:29 PM IST

भीलवाड़ा।
छठ महापर्व का इस बार कोरोना काल में कुछ अलग रूप देखने को मिला। लोगों ने अपने घर में ही घाट तैयार कर लिया। किसी ने कूलर के टब में घाट तैयार किया तो किसी ने जमीन पर गड्डा खोदकर ही छठ की पूजा कर डाली। जिसे जहां जगह मिली वही पर छठ की पूजा अर्चना की गई। कुछ महिलाओं ने स्वीविंगपुल पर जाकर पूजा की। महिलाओं जगह-जगह कृत्रिम घाट तैयार किए गए और लोगों ने पूरे उत्साह के साथ छठ के पर्व में बढ़चढ़कर भाग लिया। आस्था के इस पर्व के आगे कोरोना का भय भी टिक नहीं सका और महिलाओं, बच्चों और पुरुषों सभी ने डूबते सूर्य की पूजा की। जिला प्रशासन की ओर से छठ पूजा के लिए सामूहिक कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं मिलने के बाद पूर्वांचल के लोग घरों में ही छठ मईया की पूजा की है। आयोजन समितियों की ओर से सामूहिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन कोरोना काल में एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने किसी भी तरह के सामूहिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में मानसरोवर, नेहरू तलाई, जलदाय विभाग के टैंक, समेत अन्य जलाशयों में हर वर्ष बड़े स्तर पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन किया जाता रहा है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण घरों पर ही छठ मईया की पूजा की गई। कोरोना के चलते रामलीला का मंचन नहीं हो पाया। वहीं रावण दहन भी नहीं हो सका था।
हर जगह लगाया जाप्ता
जिला प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं देने के बाद शहर के जलाशयों में व्रतियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके चलते सभी जलाशयों पर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए ताकि वहां कोई प्रवेश नहीं कर सके। जलदाय विभाग के टैंक की दो दिन पहले नगर परिषद की ओर से साफ -सफाई भी करवाई। जलदाय विभाग ने तो प्रवेश द्वार पर नोटिस भी चस्पा कर दिया जिसमें साफ लिखा हुआ था कि कोरोना संक्रमण के चलते पूजा की वहां अनुमति नहीं है और दिशा निर्देशों के पालन का सुझाव दिया गया। कुछ लोग वहां पहुंचे भी लेकिन उन्हें बाहर से वापस भेज दिया गया। नहाय खाय के साथ शुरू हुआ छठ व्रत का पहला अघ्र्य दिया गया। इसके लिए घरों में ही जैसी व्यवस्था हुई अस्थाई जलाशय बनाया तथा डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया। कुंड में श्रद्धालुओं ने पानी में खड़े रहकर अस्ताचल को जाते सूर्य का पूजन किया। उन्हें विविध नैवेद्य अर्पित किए और छठ पर्व मनाया। इस अवसर पर भजन भी गाए गए।
गड्ढे खोदकर बनाए कुंड
कोरोना संक्रमण के कारण इस बार श्रद्धालुओं ने घरों के नजदीक खाली भूखंड और पार्कों में गड्ढे खोदकर इनमें प्लास्टिक बिछाकर कुंड बनाकर उसमें पानी भरा। इन कुंडों में खड़े रहकर डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया गया। इन कुंडों में एक-एक कर परिवार के सदस्यों ने पूजा की।
36 घंटे के उपवास का आज होगा पारणा
छठ पूजन के तहत श्रद्धालुओं ने गुरुवार शाम को खरना पर्व का व्रत खोलकर पानी पीया। ये श्रद्धालु शुक्रवार को पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर शनिवार सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देने के बाद अन्न-जल ग्रहण कर पारणा करेंगे। ऐसे में करीब 36 घंटे तक यह व्रत चलेगा।

Suresh Jain Reporting
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