भीलवाड़ा में पहली बार बड़े मंदिर में सजी पावापुरी की रचना

मोक्ष स्थली में चढ़ाए निर्माण लड्डू

By: Suresh Jain

Published: 15 Nov 2020, 04:33 PM IST

भीलवाड़ा.
भगवान महावीर ने 2547 वर्ष पूर्व पावापुरी के जल मंदिर से कार्तिक अमावस्या को मोक्ष प्राप्त किया था। कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते दिगंबर जैन समाज रविवार को सुबह मोक्ष कल्याणक पर्व मनाया। दिगंबर समाज के सभी मंदिरों में अपने हिसाब से यह त्योहार मनाया।
कल्पद्रुरुम बड़े मंदिर के प्रवक्ता पवन अजमेरा बताया कि कल्पद्रुरुम बड़े मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई थी। जहां पहली बार तीर्थ नगरी पावापुरी की सजीव कृति मनाई गई। जो पावापुरी के समान नजर आ रही थी। इसके अंदर भगवान के चरण चिह्न बनाए गए। निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया। पावापुरी की रचना गुरदीप गंभीर के मार्गदर्शन में बनाई गई।
मुनि पुगंव सुधासागर ने कहा कि रविवार सुबह भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। अमावस्या रविवार सुबह 10.३६ मिनट तक रही। महावीर स्वामी को निर्वाण की प्राप्ति कार्तिक कृष्णा अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में हुई और उसी शाम को गौधूली वेला में गणधर स्वामी को केवल ज्ञान की प्राप्त हुआ।
गाइडलाइन के अनुसार कल्पद्रुरुम मंदिर में भगवान महावीर के मोक्ष कल्याणक पर 108 रिद्धी मंत्रों से कलश के माध्यम से अभिषेक व शांति धारा की गई। इसके बाद हर्षोल्लास के साथ पावापुरी में भगवान के चरणों में निर्वाण लड्डू चढ़ाएं गए।

Suresh Jain Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned