निजी चिकित्सालय में नहीं हो रहा गरीबों का उपचार

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना
उपचार करने में होगी कई परेशानी

By: Suresh Jain

Published: 17 Feb 2021, 07:11 PM IST

भीलवाड़ा।
सरकार ने मरीजों को कैशलेस उपचार मुहैया करवाने के लिए सभी सरकारी अस्पतालों को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना से संबंद्ध किया है, लेकिन योजना के तहत भुगतान शर्तों ने निजी व सरकारी अस्पताल प्रबंधन की मुसीबत बढ़ा दी है। योजना के तहत उपचार करवाने वाले मरीजों के जिन दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई है। वे चिकित्सालयों की ओर से उपलब्ध करवा पाना कठिन हो रहा है। योजना से जुड़े अस्पतालों के प्रबंधन के लिए इन मरीजों का उपचार कर पाना तो सरल है, लेकिन उपचार का भुगतान उठा पाना बेहद मुश्किल है। वही इस योजना का लाभ अभी मरीजो को निजी अस्पतालों से नहीं मिल पा रहा है। जिले में सात निजी चिकित्सालयों को इस योजना से जोड़ा तो गया है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
मरीज के ये दस्तावेज करने होंगे अपलोड
योजना में पहले कई तरह के फर्जीवाड़े हुए है। अब इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना में कई नए नियम लागू कर दिए है। इसमें मरीज के लगाए जाने वाले इम्पलांट के बिल भुगतान के लिए मांगे गए है। डिस्टचार्ज करते समय मरीज ऑपरेशन के दौरान का फोटो, एमएलसी मरीज का उपचार करने पर एफआईआर देनी होगी। सरकारी अस्पतालों में पूरे इम्प्लांट की खरीद एक साथ होती है। इस कारण प्रत्येक के लिए बैच नंबर देना मुश्किल है। डिस्चार्ज करते समय मरीज के ऑपरेशन वाले स्थान पर ड्रेसिंग या प्लास्टर होता है। इस कारण उस स्थान की क्लिीनिकल फोटो नहीं ली जा सकती है। निजी चिकित्सालय के प्रबन्धकों का कहना है कि योजना के तहत ऑपरेशन के दौरान मरीज की फोटो लेना उसकी मर्यादा को भंग करने जैसा है। फोटो के लिए कैमरे को ऑपरेशन थियटर में ले जाना भी संक्रमण को न्योता देने जैसा है। योजना के तहत उपचाराधीन एमएलसी के मरीज की एफआईआर अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं होती है। ऐसे में इसे जुटाना भी एक मुश्किल काम है।
नहीं मिल रही पोर्टेबिलिटी की सुविधा
प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार आयुष्मान भारत योजना में किसी भी राज्य में मरीज का इलाज करवाना आसान होगा। लेकिन अभी राज्य स्तर से मरीजों का डाटा भारत सरकार को ट्रांसफर करना है। इस कार्य में अभी करीब तीन माह का समय ओर लगेगा। ऐसे में राजस्थान से बाहर रहने वाले व बाहर के राजस्थान में रहने वाले श्रमिक परिवारों को इलाज के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन अस्पतालों में होगा निशुल्क उपचार
सीएमएचओ डॉ. मुस्ताक खान का कहना है कि शहर के सात प्रमुख निजी चिकित्सालयों के प्रस्ताव को मुख्यालय भेज दिया गया है। वहा से स्वीकृति मिल चुकी है। इन सात अस्पतालों में नरेश पोरवाल हॉस्पिटल, बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल, स्वास्तिक चिकित्सालय, गार्गी हॉस्पिटल आसीन्द, कृष्णा हॉस्पिटल, रामस्नेही चिकित्सालय तथा सिद्धि विनायक चिकित्सालय शामिल है। लेकिन उधर इन अस्पतालों के प्रबन्धकों का कहना है कि सरकार की ओर से अभी उन्हें कोई सूचना नहीं है।

Suresh Jain Reporting
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