दिगम्बर जैन समाज के दश लक्षण पर्व प्रारम्भ

पहले दिन की उत्तम क्षमा धर्म आराधना

By: Suresh Jain

Published: 10 Sep 2021, 10:17 AM IST

भीलवाड़ा .
दिगम्बर जैन समाज के दस लक्षण पर्व शुक्रवार को उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हुआ। जैन मंदिरों में सुबह से ही अभिषेक करने वालों की कतारे लगी रही। श्रावक अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, व्रत, उपवास, रस त्याग आदि के साथ धर्म आराधना की। अगले 10 दिनों में दस धर्म की आराधना की जाएगी। पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि इस दौरान प्रतिदिन प्रात: 6 बजे से अभिषेक क्रिया होगी। प्रात: ९.१५ बजे से मुनि विद्यासागर महाराज के प्रवचन होंगे। दिन में 3 बजे से तत्वार्थ सूत्र पर स्वाध्याय, सांय 6.30 बजे प्रतिक्रमण, 7 बजे आरती होगी।
रोट तीज का पर्व मनाया
दिगम्बर जैन समाज ने गुरुवार को रोट तीज का पर्व मनाया। आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चुन्नड, घाट आदि परंपरागत साडिय़ों में महिलाओं ने रोट तीज पूजन की। जैन समाज के घरों में रोट, खीर, तुरई की सब्जी आदि व्यंजन बना कर मित्रों, परिचितों के साथ भोजन का आनंद लिया।
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व्रतों की रक्षा के लिए परिश्रम ही शीलव्रत-मुनि विद्यासागर
भीलवाड़ा . बालयति निर्यापक श्रमण मुनि विद्यासागर महाराज ने कहा कि सोलह कारण भावना क्रम में प्राणी दर्शन विशुद्धि पूर्वक विनयवान बनते हुए तीसरी निरतिचार शीलव्रत भावना को धारण करता है। जैन दर्शन में हिंसादिक पापों से निवृत होकर अहिंसा, अचौर्य, सत्य आदि पालन करने को व्रत कहा गया है। इन व्रतों की रक्षा के लिए जो परिश्रम किया जाता है, उसे शीलव्रत कहा गया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में 18 हजार शीलव्रत बताए गए है, जो कि सम्पूर्ण रूप से चौदहवें गुणस्थान में केवली भगवान को होते है।

Suresh Jain Reporting
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