दिव्यांगों के लिए लिफ्ट ही नहीं , कैसे पहुंचे कलक्टर तक

भीलवाड़ा कलक्ट्रेट में दिव्यांगों को सहारा एवं सुविधा देने के लिए नगर विकास न्यास की तरफ से लगाई जाने वाली लिफ्ट अब खतरे में है। लिफ्ट के अभाव में दिव्यांगों के साथ ही बुर्जुगों को अपनी पीड़ा कलक्टर तक पहुंचाने के लिए शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा है।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 09 Jan 2021, 12:33 PM IST

भीलवाड़ा। कलक्ट्रेट में दिव्यांगों को सहारा एवं सुविधा देने के लिए नगर विकास न्यास की तरफ से लगाई जाने वाली लिफ्ट अब खतरे में है। लिफ्ट के अभाव में दिव्यांगों के साथ ही बुर्जुगों को अपनी पीड़ा कलक्टर तक पहुंचाने के लिए शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा है।

जिले के हाकम का दफ्तर प्रथम मंजिल पर और जनता का दरबार भी उनके बगल में है। इसके बावजूद दिव्यांगों को उन तक फरियाद पहुंचाने के लिए ना तो कोई सहारा और ना ही कोई सुविधा। ऐसे में एक दशक पूर्व अस्तित्व में आई लिफ्ट की योजना भी कागजी होने से विकलांगों की परेशानी कम नहीं हो सकी है। कलक्ट्रेट में जिला कलक्टर कार्यालय, अतिरिक्त कलक्टर प्रशासन कार्यालय, राजस्व, न्याय, आपदा प्रबंधन व चुनाव शाखा है। अजा-जजा विकास परियोजना निगम व जिला उपभोक्ता मंच कई मुख्य कार्यालय प्रथम मंजिल पर हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। सिर्फ सीढ़ी ही लोगों व दिव्यांगों के आने जाने का जरिया है।

दिव्यांग की कैसे हो सुनवाई

यहां बुर्जुग एवं विकलांगों के लिए प्रथम मंजिल तक पहुंचने के लिए रेम्प या लिफ्ट नहीं होने से उनकी परेशानी बरकार है। कई विकलांग लिफ्ट एवं रेम्प के अभाव में अपनी गुहार जिला कलक्टर के समक्ष नहीं लगा पा रहे और न ही वह जनता दरबार का दरवाजा खटखटा पा रहे हैं।

दस साल से घूम रही फ ाइल

राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में जिला कलक्टर कार्यालय में दिव्यांगों की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर जिला प्रशासन ने वर्ष 2016 में अमल किया। इसके चलते लिफ्ट लगाने का जिम्मा नगर विकास न्यास को सौंपा गया। न्यास ने लिफ्ट के लिए 15 सितम्बर 2016 को 16 लाख 76 हजार 048 रुपए मंजूर किए और 18 अक्टूबर 2016 को एक फ र्म के नाम वर्क ऑडर जारी किया। लेकिन यह वर्क आर्डर निरस्त हो गया। इसके बार वर्ष २०१८ में नगर विकास न्यास ने फिर लिफ्ट की सुध ली, लेकिन तकनीकी कारण आडे आ गए फिर लिफ्ट फिसल गई। कलक्टर ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी, लेकिन निर्माण विभाग में फाइल ही आगे नहीं बढ़ी।

सौ से अधिक जरूरतमंद

लिफ्ट का काम शुरू नहीं होने से कलक्ट्रेट भवन में लिफ्ट के लिए छोड़ी गई जगह भी कोविड़ व चुनाव कंट्रोल रूम में तब्दील हो कर रह गई। वरिष्ठ नागरिक मंच एवं संस्थान के सदस्यों ने भी ज्ञापन के जरिए लिफ्ट लगाने की मांग कई बार उठाई है। उनका कहना है कि कलक्ट्रेट में रोजाना सौ से अधिक दिव्यांग, बुजुर्ग लोग आते है, लेकिन कलक्ट्रेट का मुख्यालय प्रथम मंजिल पर होने एवं सीढ़ी भी सहज नहीं होने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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यूआईटी को देंगे जिम्मेदार

दिव्यांग व बुजुर्ग की पीड़ा सामने आई है। नगर विकास न्यास के जरिए लिफ्ट कलक्ट्रेट में स्थापित किया जाना प्रस्तावित है, नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राकेश कुमार, उप जिला मजिस्टे्रेट, भीलवाड़ा

Narendra Kumar Verma Reporting
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