पेड़ बचाने की  पहल-वे चाहते हैं उनका अंतिम संस्कार लकड़ी नहीं, एलपीजी गैस से हो

पेड़ बचाने की  पहल-वे चाहते हैं उनका अंतिम संस्कार लकड़ी नहीं, एलपीजी गैस से हो

Rajesh Kumar Jain | Updated: 04 Jun 2019, 08:31:55 PM (IST) Bhilwara, Bhilwara, Rajasthan, India

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 भीलवाड़ा।

ग्लोबिंग वार्मिंग से से पर्यावरण की बिगड़ती तस्वीर ने उनके मन को इस कदर कचोटा कि वे पेड़ बचाने की मुहिम में जुट गए। पेड़ों को कुल्हाड़ी से बचाने के लिए लोगों को विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए जाग्रत किया और इस दिशा में सकारात्मक पहल की। उन्हें लगा कि पार्थिव देह के अंतिम संस्कार के लिए भी हजारों पेड़ कट रहे हैं और लाखों टन लकडि़यां राख हो रही हैं।

 

एेसे में महावीर इन्टरनेशनल व दिगम्बर जैन अर्थिक विकास संस्थान से जुड़े 66 समाजसेवियों ने संकल्प लिया कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार लकडि़यों के बजाय एलपीजी शवदाह गृह में किया जाए। पेड़ बचाने की उनकी मुहिम अब प्रदेश के अन्य हिस्सों में अलख जगाने लगी है।

 

महावीर इन्टरनेशनल भीलवाड़ा व दिगम्बर जैन आर्थिक विकास संस्थान के अध्यक्ष एवं पूर्व आइएएस अधिकारी निर्मल जैन ने राजेन्द्र टोंग्या, हिम्मत सुराणा, रमेश पाटनी, शशि टोंग्या के साथ पेड़ बचाने की मुहिम का आगाज किया। लोगों में जन चेतना के लिए पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू के सहयोग से जनचेतना रैली, पोस्टर प्रतियोगिता, संगोष्ठी एवं वार्ताएं की। फोरलेन व शहर के उद्यानों को हराभरा रखने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए।

 

यह रही पहल

 

६६ समाजसेवियों ने अपना दाह संस्कार पंचमुखी मुक्तिधाम परिसर में बने एलपीजी शवदाह गृह में करने का संकल्प लिया। ये सभी एलपीजी शवदाह गृह के आधुनिकीकरण में जुटे हैं। इस अभियान में महिलाएं भी आगे आई हैं।

 

यूं बोले जागरूक

 

पूर्व आइएएस अधिकारी जैन बताते हैं कि पेड़ों को बचाना जरूरी है। पेड़ बचेंगे तो हरियाली बचेगी। टोंग्या व सुराणा कहते हैं, चूंकि असंख्य जीव दाह संस्कार के समय लकड़ी व थापडिय़ों (उपलों) के साथ जलकर मर जाते हैं। उनको जीवनदान के उद्देश्य से भी एलपीजी शवदाह गृह में अंतिम संस्कार का संकल्प लिया है।

 

 

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