टफ योजना 5 साल बढ़े तो देश में टेक्सटाइल उद्योग का होगा विकास

वस्त्र मंत्रालय ने मेवाड़ चैम्बर से मांगे सुझाव

By: Suresh Jain

Published: 23 Jan 2021, 01:28 PM IST

भीलवाड़ा।
वर्ष 2000 में लागू की गई टफ योजना देश में टेक्सटाइल उद्योग के आधुनिकीकरण और विकास में मील का पत्थर साबित हुई है। टफ योजना से स्पिनिंग उद्योग ने कई केन्द्रों पर पावरलूम एवं प्रोसेसिंग उद्योग में नई तकनीक का उपयोग कर न केवल उत्पादन और गुणवत्ता को बढ़ाया बल्कि टेक्सटाइल निर्यात भी कई गुणा बढ़ा है। देश के पावरलूम व प्रोसेसिंग उद्योग के पूर्ण आधुनिकीकरण के लिए अभी काफी लम्बा रास्ता पार करना है। मार्च २०२२ के बाद टफ योजना को 5 वर्ष के लिए और आगे बढ़ाया जाना चाहिए। यह सुझाव मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने वस्त्र मंत्रालय को प्रस्तावित नई टेक्सटाइल नीति के लिए भेजा है।
चेम्बर के महासचिव आर.के. जैन ने बताया कि वस्त्र मंत्रालय ने मेवाड़ चैम्बर से नई टेक्सटाइल नीति के संबंध में सुझाव मांगे हैं। वर्तमान में देश में लगभग 35 लाख पावरलूम लगे है। इनमें से लगभग 10 प्रतिशत का ही आधुनिकीकरण हुआ है। पावरलूम, प्रोसेसिंग एवं टेक्नीकल टेक्सटाइल को प्रोत्साहन देने के लिए टफ योजना को 5 वर्ष के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।
जैन ने कहा कि बैंक लघु एवं मध्यम उद्योगों से 70 प्रतिशत तक कोलेटरल सिक्योरिटी मांगते है, जो कि काफी अधिक है। उद्योग के 5-6 वर्ष पुराने होने पर मशीनों की कीमत सिक्योरिटी में शामिल नही की जाती है। नई नीति में एमएसएमई उद्योगों के लिए बैंको के ऋण, कोलेटरल सिक्योरिटी एवं क्रेडिट रैंटिंग के बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश की मांग की गई है। पिछले 2 वर्षो में रिजर्व बैंक ने कई बार रेपो रेट कम की है, लेकिन लघु एवं मध्यम उद्योगों को इसका फायदा नही मिला। नई नीति में इसके लिए भी प्रावधान करना चाहिए।
ड्यूटी ड्रा बैक की दरें बढ़ें
टेक्सटाइल निर्यात बढाने के लिए ड्यूटी ड्रा बैक के प्रावधानों को बढ़ाने के साथ मेनमेड टेक्सटाइल के लिए ड्यूटी ड्रा बैक की दरें 3 से 5 प्रतिशत से बढ़ाई जानी चाहिए। राजस्थान, पंजाब, हिमाचल आदि कई राज्य बन्दरगाहों से काफी दूर है। ऐसे राज्यों में स्थित टेक्सटाइल इकाईयों को निर्यात पर भाड़ा अनुदान देना चाहिए। टेक्सटाइल उद्योग में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के लिए विभिन्न उपकरण आरओ, एमईई के लगाने पर 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान भी मिलना चाहिए। उद्योग की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि यार्न पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत और कपडे पर 5 प्रतिशत। केन्द्र सरकार सरप्लस जीएसटी को रिफंड कर रही है। इस प्रक्रिया को समाप्त कर यार्न पर भी जीएसटी दर 5 प्रतिशत की जानी चाहिए। विद्युत दरों में भी विसंगतियां है। अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में विद्युत दर कई गुना अधिक है। पावरलूम उद्योग में राजस्थान पिछड़ा हुआ प्रदेश है। जहां देश में लगे 35 लाख लूमों में से केवल 25 हजार लूम ही राजस्थान में है। पावरलूम उद्योगों को विद्युत दरों में अनुदान के भी प्रावधान किए जाने चाहिए।

Suresh Jain Reporting
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