जिम्मेदारों की लापरवाही से नहीं बुझ रही अनदेखी की आग

गर्मी का मौसम आते ही हर रोज चिंगारियां उठने से आग की घटनाएं हो रही है

By: tej narayan

Published: 25 Apr 2018, 02:07 PM IST

भीलवाड़ा।

गर्मी का मौसम आते ही हर रोज चिंगारियां उठने से आग की घटनाएं हो रही है। बीते एक माह में सौ से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है। इनमें कई पशु जिंदा जल गए तो लाखों रुपए की फसल राख हो गई।अधिकांश जगह नगर परिषद की दमकल पहुंची तब तक सामान खाक हो चुका था। वजह यह है कि गाडि़यां बहुत पुरानी है। लंबी जाने पर स्पीड नहीं पकड़ पाती है। एेसे में पहुंचने तक सामान भी राख बन जाता है। इस अनदेखी से जिले में भी और भी कभी बड़ा हादसा हो सकता है।

 

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राजधानी में पिछले माह हुए अग्निकांड में पांच लोग पलभर में राख में बदल गए। इसमें बड़ी लापरवाही यह रही कि फायर ब्रिगेड देरी से पहुंची। जो गाड़ी मौके पर पहुंची उसके नोजल ने भी काम नहीं किया। इस लापरवाही से चंद सैकंड में पांच जिंदगी चली गई। लापरवाही का यह हाल केवल प्रदेश मुख्यालय का ही नहीं बल्कि नगर परिषद का भी है। यहां दमकल ने दम तोड़ दिया है। दस साल पुरानी होने से हांफने लगी है। अधिकांश गाडि़यां पुरानी है।

 

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आग लगने की सूचना पर जब गाडि़यों को ले जाते हैं तो स्पीड नहीं बन पाती है। अधिकांश दमकलें कबाड़ की स्थिति में हैं। इन्हें बार-बार मरम्मत कराकर काम चलाया जा रहा है। नगर परिषद प्रशासन की इस बड़ी लापरवाही का खमियाजा आमजन को भुगतना पड़ सकता है।


नहीं गाडि़यां खरीदने पर नहीं हो रही बातनगर परिषद में आयुक्त व सभापति के बीच विवाद से दमकल खरीदने वाली फाइल पर भी चर्चा नहीं हो पा रही है। परिषद ने गैराज अनुभाग के प्रस्ताव पर दो फायर वाहन खरीदने के लिए 52 लाख रुपए का प्रस्ताव ले रखा है। 28 जुलाई 2017 की बैठक में बोर्ड ने मंजूरी भी दे दी। इसके बावजूद नई फायर गाडि़यां नहीं खरीदी गई है।

 

अधिकांश गाडि़यां हो चुकी है कबाड़
परिषद के दमकल वाहनों का जायजा लिया तो देखा कि गाडि़यां अधिकांश समय खराब रहती है। इनकी बॉडी जंग खा चुकी है। कांच नहीं है। गाड़ी के टैंक भी फूटे हुए है। पानी फेंकने वाले उपकरण पुराने हो गए हैं। इससे आग बुझाने में समस्या होती है। स्थिति यह है कि दमकलकर्मियों की सुविधा के लिए हेलमेट सहित अन्य सुरक्षा उपकरण भी पूरे नहीं है।


निजी संस्थानों की गाडि़यों का ले रहे सहारा
जिले में आग लगने पर हिंदुस्तान जिंक आगूंचा माइंस, जिंदल ग्रुप सहित कुछ प्रोसेस हाउस के पास भी दमकल है। तुरंत वहां सूचना देने से गाडि़यां पहुंच जाती है। केवल सरकारी दमकलों के भरोसे रहे तो कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। अधिकांश जगह तो निजी गाडि़यों से ही काम चलाना पड़ता है।

 

यह है दमकल सेवा की स्थिति
01 बोलेरो (छोटी गाड़ी जो गलियों में जाती है )
05 लीलेंड( सभी पुरानी है। बॉडी जर्जर हो चुकी है।)
02 टाटा ( आए दिन खराब होती है, मुश्किल से काम चल रहा )
02 गाड़ी नई खरीदने का प्रस्ताव है तैयार
कर्मचारियों की कमी से भी परेशानी
28 है कुल कर्मचारी
06 चालक है नगर परिषद के स्थाई कर्मचारी
15 चालक संविदा पर
25 है होमगार्ड

 

फाइल मंगवाकर फिर से चर्चा करेंगे
दमकलों की खरीद करनी है। इसके लिए फाइल मंगवाकर फिर से चर्चा की जाएगी। यह समस्या पार्षदों ने भी बताई थी। जो जरुरत की सामग्री है उसे जल्द खरीदेंगे।
पद्मसिंह नरूका, आयुक्त नगर परिषद

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