रोडवेज से कैसा पक्षपात, फ्रंट लाइन वर्कर नहीं माना, सफर में बंटा कोरोना तो भारी पड़ेगी लापरवाही

रोडवेज चालक-परिचालक रोजाना हजारों हजारों यात्रियों के सम्पर्क में आकर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचा रहे, वे अब भी वैक्सीनेशन से दूर है।

By: Akash Mathur

Updated: 15 Apr 2021, 10:31 AM IST

भीलवाड़ा. सरकार ने कोरोना वैक्सीन लगाने में रोडवेज के कर्मियों से पक्षपात कर दिया। सुनने में अचरज होगा, लेकिन सच्चाई यही है कि कलक्टे्रट के बाबू से लेकर छोटे कर्मचारी को फ्रंट लाइन वर्कर मानकर कोरोना की पहली और दूसरी डोज लगा दी गई, लेकिन रोडवेज चालक-परिचालक रोजाना हजारों हजारों यात्रियों के सम्पर्क में आकर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचा रहे, वे अब भी वैक्सीनेशन से दूर है। हालांकि सरकार ने 45 साल से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीनेशन की छूट दे रखी, लेकिन रोडवेज में प्रदेश में पांच हजार ऐसे कर्मचारी है जो इस आयु वर्ग में नहीं आ रहे। अकेले भीलवाड़ा आगार में ही साठ कर्मचारी आयु के दायरे से बाहर है। ऐसे में वैक्सीनेशन के अभाव में कोरोना संक्रमण काल में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।

इसलिए जरूरी, सीधे सम्पर्क में आ रहे
रोडवेज के चालक-परिचालक आमजन के सीधे सम्पर्क में आते है। इसके अलावा बुकिंग पर बैठे कर्मचारी का भी यहीं हाल है। रोडवेज बस में सफर के दौरान कई जनें मास्क नहीं लगाते तो कई सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखते। परिचालक उनके सम्पर्क में आते है। ऐसे में कोरोना फैल सकता है।

जरूरत थी तो काम में लिया

पिछले साल लॉकडाउन के समय दूर-दराज के प्रदेशों में रहने वाले श्रमिकों को उनके गांव तक पहुंचाने के लिए सरकार ने रोडवेज का सहारा लिया। महाराष्ट्र, बिहार, उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में रोडवेज की स्पेशल बस चलाकर श्रमिकों को भेजा गया। उस समय सरकार को रोडवेज की याद आ गई, लेकिन वैक्सीनेशन के समय उनको भूला दिया गया।

फिर मचाया कोहराम, याद दिलाने के लिए लिखा पत्र
देश समेत प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर कोहराम मचा रही है। संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कोरोना से बचाव जरूरी हो गया है। चिकित्सा विभाग को याद नहीं आई तो भीलवाड़ा आगार प्रबंधन को पत्र लिखना पड़ा। मुख्य आगार प्रबंधक ने आरसीएचओ संजीव शर्मा को पत्र लिखकर रोडवेज कर्मचारियों को वैक्सीनेशन की डोज लगाने का आग्रह किया। तीन दिन बीतने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।

इनका कहना है
रोडवेज के कई कर्मचारी 45 साल से नीचे है। रोजाना सैकड़ों लोगों के सम्पर्क में आते है। सरकार ने फ्रंट लाइन वर्कर नहीं माना। नियम के मुताबिक इनको डोज नहीं लग सकती। ऐसे में विशेष शिविर लगाकर इनको डोज लगाने की जरूरत है। इसके चिकित्सा विभाग को पत्र लिखा है।

- अनिल पारीक, मुख्य प्रबंधक, भीलवाड़ा आगार

रोडवेज कर्मचारियों को भी फ्रंट लाइन वर्कर में शामिल किया जाना चाहिए था। चालक-परिचालक प्रतिदिन सौ से अधिक यात्रियों के सम्पर्क में आते है। पचास से साठ कर्मचारी 45 साल से नीचे है। इनमें परिचालक ज्यादा है। तत्काल डोज लगाने की जरूरत है।
- पंकज व्यास, शाखा सचिव, संयुक्त कर्मचारी फैडरेशन (रोडवेज)

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फैक्ट फाइल

250
भीलवाड़ा आगार में कर्मचारी

60
डोज के लिए निर्धारित आयु से कम

107
स्थानीय बेड़े में शामिल बसें

52
आगार प्रदेश में

5000
कर्मचारी 45 साल से नीच

Akash Mathur
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