रेट्रोफिटिंग से क्या होगा जो सोना खाद का निर्माण करेगा

स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों रेट्रोफिटिंग से चल रहा जोडऩे का काम
गावों में बने 6 हजार शौचालयों को 1 से 2 गढ्ढे में किया जा रहा परिवर्तित
सोना खाद का निर्माण व विक्रय से लाभार्थी को प्रति वर्ष 12 हजार रुपए की होगी आय

By: Suresh Jain

Published: 07 Mar 2020, 07:17 PM IST

भीलवाड़ा।
Clean India Mission केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत पूर्व में बनाए गए हजारों शौचालयों को रेट्रो फिटिंग से जोडऩे का अभियान चलाया है। योजना के तहत गावों में बने शौचालयों को 1 गढ्ढे से 2 गढ्ढे के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। जिले में लगभग ६ हजार ऐसे शौचालय है जिसे इस अभियान के तहत जोडऩे का काम चल रहा है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने राशि का भी आवंटन किया है। Clean India Mission इसके सफल होने के साथ ही इन गढ्ढों से सोना खाद का निर्माण की योजना भी बनाई गई है। इस खाद का विक्रय होने से लाभार्थी को प्रति वर्ष 12 हजार रुपए की आय होगी। इस योजना के तहत दिए जिले के सभी शौचालयों को जोड़ा गया है। हालांकि इस योजना का लाभ अगले कुछ सालों बाद मिलेगा।
एसबीएम प्रभारी दिनेश चौधरी ने बताया कि जिले में बिना रेट्रो फिटिंग के बने शौचालयों को इससे जोड़ा जा रहा है। ऐसे शौचालयों की संख्या लगभग ६ हजार है। योजना के तहत एससी, एसटी, बीपीएल तथा दिव्यांग को ही लाभान्वित किया जाएगा।
प्रत्येक रेट्रो फिटिंग पर 45 सौ रुपए
योजना के तहत सरकार ने एक रेट्रो फिटिंग के कार्य पर ४५ रुपए व्यय करने के लिए जिला प्रशासन को करोड़ों का बजट दिया है। प्रत्येक लाभार्थी को साढ़े चार हजार रुपए स्वीकृत किए जाएंगे। जो ग्राम पंचायत के माध्यम से संबंधित वैंडर के माध्यम से रेट्रो फिटिंग की कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान के तहत पूर्व निर्मित गटर टेंक के पास एक बाई एक मीटर चौडा लंबा व एक मीटर गहरा टैंक का निर्माण किया जाएगा। जिसमें एक जंक्शन बॉक्स पर लगाया जाएगा। जो एक गढ्ढे को भरने के बाद दूसरे गढ्ढे को खोलने तथा बंद करने के काम आएगा।
कैसे हागा सोना खाद का निर्माण
रेट्रो फिटिंग के माध्यम से बनाए जाने वाले गढ्ढे से सोना खाद का निर्माण होगा। जो जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम करेगा। एक गढ्ढे को मानव मल से भर जाने के बाद एक वर्ष तक उपयोग नहीं लेने से गढ्ढे में भरा हुआ मल चाय की पत्ती जैसी भुरभुरी खाद में तब्दील हो जाएगा। जिसे गढ्ढे से निकालकर पैकिंग कर खुले बाजार में 300 प्रति किलो की दर पर बेचा जा सकेगा। एक गढ्ढे में 40 किलो सोना खाद का निर्माण होगा। बाजार दर 30० रुपए प्रति किलो होने से प्रत्येक लाभार्थी को 12 हजार साल का लाभ मिलेगा। इसके अलावा स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा, खुले में फैल रही गंदगी पर रोकथाम लगेगी। लोगों को गंदगी जनित बीमारियों से निजात मिलेगी।

Suresh Jain Reporting
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