दिगम्बर जैन मंदिरों में उत्तम संयम धर्म की आराधना

108 रिद्धिमंत्र से अभिषेक एवं स्वर्ण झारी से शांतिधारा

By: Suresh Jain

Published: 15 Sep 2021, 10:17 PM IST

भीलवाड़ा।
गुणवानों, सज्जनों, साधुओं के जीवन में जब दुख के प्रसंग आए या कोई उपसर्ग आए तो दूसरे साधर्मी बंधु निर्दोष विधि से उनके दुख, उपसर्ग दूर करें, उसे वैयावृत्य कहते है। पूर्व कर्मो के प्रभाव से रोग आने पर मुनि जनों को औषधि दान करना भी वैयावृत्य कहलाता है। यह बात बालयति निर्यापक मुनि विद्यासागर महाराज ने बुधवार को सोलह कारण भावना में वैयावृत्य भावना पर प्रवचन में कही।
आरके कॉलोनी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में बुधवार को उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। जैन दर्शन के अनुसार विपरीत स्थिति में मन पर नियंत्रण रखना संयम धर्म है। संयम के अभाव में भरत चक्रवति ने अपने भाई बाहुबली पर चक्र चला दिया। सत्य को जानते हुए संयम के अभाव में पाण्डवों को वन में भटकना पड़ा, लेकिन उन्हीं पाण्डवों को मुनि अवस्था में लोहे के गर्म-गर्म आभूषण पहनाए गए तो संयम धारण करने से वे शांतचित साधना करते रहे एवं केवल्य ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष चले गए।
आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि दशलक्षण के दौरान कई श्रावक-श्राविकाओं ने 5-5 उपवास किए है। बुधवार को राजेंद्र रजत गोधा ने 108 रिद्धिमंत्र से अभिषेक एवं स्वर्ण झारी से शांतिधारा की। रतलाम निवासी जयकुमार, इन्द्र, निलय जैन ने शांतिनाथ भगवान की शांतिधारा की। पूनम कोठारी, वीणा मंगल, सुरेन्द्र गोधा के संचालन में सामूहिक पूजन हुई।
शास्त्रीनगर स्थित पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पाश्र्वनाथ भगवान पर शान्तिधारा प्रकाशचंद, नवीन, संजय, विजय चौधरी, भगवती देवी, सुगनचंद, विजय, अजय झांझरी, श्यामवर्ण पाषाण प्रतिमा पाश्र्वनाथ भगवान की शांतिधारा शांतिदेवी, मंजूदेवी, दिलीप, प्रवीण, नवीन, राहुल चौधरी ने की। जैन महिला जागृति, पाश्र्वनाथ महिला मंडल, समता महिला मंडल, जूनियर जैन जागृति महिला मंडल शास्त्रीनगर की सदस्याओं ने सामूहिक पूजन किया।
सुभाषनगर नेमिनाथ मंदिर में श्रावको ने भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की। पंडित रितिक ने उत्तम संयम धर्म की जानकारी दी। शाम को संगीतमय भक्तामर की आरती की गई।
बापू नगर स्थित पदम प्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष लक्ष्मीकांत जैन ने बताया कि अभिषेक के उपरांत आशाराम जैन अग्रवाल ने मूलनायक पदम प्रभु भगवान पर शांति धारा की। पूनमचंद सेठी के निर्देशन में पूजा अर्चना की गई। सांयकाल शास्त्र सभा के बाद धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
शास्त्रीनगर स्थित सुपाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पंडित आनंद शास्त्री ने बताया कि आत्म स्वभाव की श्रद्धा-ज्ञानपूर्वक शुभाशुभ इच्छाओं को रोककर आत्मा में एकाग्र होना ही परमार्थ (निश्चय) से उत्तम संयम धर्म है। मीडिया प्रभारी भागचंद पाटनी ने बताया कि शांतिधारा अशोक कुमार, संतोष, नीरज व पंकज बडज़ात्या ने की। मध्यान्ह में शास्त्री के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र का वाचन, सामायिक, प्रतिक्रमण शास्त्र स्वाध्याय किया गया।

Suresh Jain Reporting
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