यहां कोरोना ने छीन ली 2500 शिक्षकों की नौकरी, कोई बेच रहा सब्जी तो कोई ढूंढ़ रहा मजदूरी

भरण पोषण के अलावा बीमार परिजनों के इलाज के लिए भी हो रहे मोहताज

By: हुसैन अली

Published: 20 Jul 2020, 10:09 PM IST

भिण्ड. कोरोना महामारी के चलते भिण्ड जिले में 2500 से अधिक प्राइवेट शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। आलम ये है कि वे न सिर्फ परिवार के लालन-पालन बल्कि बीमार परिजन के इलाज के लिए भी मोहताज हो गए हैं। सरकार द्वारा इस ओर शीघ्र ही कोई कदम नहीं उठाया गया तो हालात भड्डयावह हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में ४०० से अधिक प्राइवेट विद्यालयों में लगभग 3000 शिक्षक कार्यरत थे, जिनमें से 2500 से ज्यादा घर बैठा दिए गए हैं। विद्यालय संचालक उन्हें घर बैठे पगार देने की स्थिति में इसलिए नहीं हैं कि बच्चे स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, ऐसे में उन्हें फीस भी नहीं मिल पा रही है। लिहाजा जो दो से तीन प्रतिशत शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण कार्य कर रहे हैं वही अपनी गृहस्थी की गाड़ी किसी तरह से खींच पा रहे हैं।

कोचिंग सेंटर पर भी लटके ताले, फल-सब्जियां बेचने को मजबूर

यहां बता दें कि शहर में करीब 200 से ज्यादा ट्यूशन व कोचिंग सेंटर संचालित थे। वहीं जिले के मेहगांव, गोहद, लहार, रौन, फूप, गोरमी, मौ आदि कस्बों में भी इस तरह के कोचिंग सेंटर्स की संख्या करीब 400 थी जो इन दिनों पूरी तरह से बंद हैं। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। यहां बता दें कि प्राइवेट विद्यालयों के शिक्षकों को प्रति माह पगार के रूप में औसतन ६ से ८ हजार रुपए मिल रहे थे जो इन दिनों बंद हैं। वहीं कोचिंग एवं ट्यूशन के माध्यम से होने वाली आय भी ठप हो गई है। परेशानी ये है कि इन दिनों शिक्षण संस्थान बंद हैं, लेकिन दूसरे कारखाने या संस्थान भी उतने सक्रिय नहीं हैं जहां अन्य लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सके। बहरहाल बेरोजगार हुए शिक्षकों में से १० से १५ फीसद इन दिनों गली-मोहल्लों में जाकर फल एवं सब्जियां बेचते नजर आ रहे हैं। लिहाजा फल व सब्जी बेचने वालों की तादाद अधिक हो जाने से सारे के सारे शिक्षक इसी काम पर नहीं उतर सकते। ऐसे में परेशानी ये है कि यह तबका परिवार के लालन पालन के लिए अब क्या करे।

पिछले चार महीने से बेकार बैठे हैं। छह सदस्यीय परिवार है जिसके भरण पोषण के लिए कोई जरिया नहीं हैं। इतने दिनों में जमा पूंजी भी खर्च हो गई और 15 हजार रुपए का उधार भी हो गया है।
शैलेष सक्सेना, प्राइवेट शिक्षक हॉउसिंग कॉलोनी भिण्ड

चार सदस्यीय परिवार है। पिछले चार माह में बैंक खाते मे जमा 18 हजार राशन में ही खर्च हो गए। इसके अलावा १२ हजार रुपए उधारी चढ़ गई है।
शकील खान, शिक्षक मेहगांव

सात सदस्यीय परिवार के लालन पालन के लिए सब्जी बेचना शुरू किया है। इसमें भी गुजारा नहीं हो रहा क्योंकि इन दिनों सब्जी बेचने वाले बहुत ज्यादा हो गए हैं। मां बीमार है, इलाज कहां से कराएं।
रामदीन शाक्य, प्राइवेट शिक्षक रौन

स्कूल बंद हैं, लेकिन कोई अन्य संस्थान में भी तो काम नहीं मिल पा रहा है। परिवार पालने के लिए भवन निर्माण कार्य में मजदूरी भी तलाश रहा हूं। कुछ दिनों के लिए काम मिल गया था अब वह भी नहीं मिल रहा। सोचा नहीं था ऐसे भी हालात होंगे।
प्रमोद कुमार जाटव, प्राइवेट शिक्षक लहार

हुसैन अली
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