गांधी सागर डेम से छोड़ा 95 हजार क्यूसेक पानी, चंबल के तटवर्ती गांवों में खौफ, घरों को खाली करने की तैयारी

परिस्थितियों का सामना करने गठित की गई 23 सदस्यीय बाढ़ प्रबंधन समिति

By: हुसैन अली

Updated: 30 Aug 2020, 10:29 PM IST

कदौरा. शनिवार की रात गांधी सागर बांध से 95 हजार क्यूसेक पानी चंबल नदी में छोड़ा गया है। ऐसे में भिण्ड जिले के अटेर क्षेत्र अंतर्गत चंबल के तटवर्ती गांव के करीब 15 हजार ग्रामीण बाढ़ की आशंका से घिरकर खौफजदा होने लगे हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए 23 सदस्यीय आपदा प्रबंधन समिति गठित कर दी है।

बीते साल कोटा बैराज बांध से चंबल नदी में छोड़े गए हजारों क्यूसेक पानी के बाद अटेर में बाढ़ आ गई थी। हालात इतने भयावह हुए कि कई घर जमींदोज हो गए तथा दर्जनों मवेशी पानी में डूबकर मर गए थे। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला की मौत भी हो गई थी। हालातों से निपटने के लिए सोशल वर्कर्स के अलावा एनडीआरएफ व सेना के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा था। बीते साल बेकाबू हुए हालातों को क्षेत्र के लोग अब तक नहीं भूल पाए हंै। इस बार एसडीएम अभिषेक चौरसिया ने आपदा प्रबंधन समिति गठित करने के उपरांत उन्हें क्षेत्र में सक्रिय भी कर दिया है।

समिति में यह लोग शामिल

आपदा प्रबंधन समिति में प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और धार्मिक संस्था के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों को शामिल किया गया है। समिति के अध्यक्ष स्वयं एसडीएम हैं। जबकि समन्वयक जनपद पंचायत सीईओ को बनाया गया है। समिति में जनपद अध्यक्ष सोमराज नरवरिया, उपयंत्री एसवी पचौरी, उपयंत्री पवन श्रीवास, उपयंत्री मेघा शिवहर, उपयंत्री हरिशंकर शर्मा, तहसीलदार रामजीलाल वर्मा, नायब तहसीलदार सुरपुरा विजय त्यागी, बीएमओ डॉ. जेएस राजपूत, पुलिस थाना प्रभारी रामप्रकाश शर्मा, सुघर सिह प्रजापति, कमलेश गोले पटवारी, अजय सिंह, राहुल गुप्ता, एसएस राठौर शामिल हैं, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि विजय बौहरे, मनोज दैपुरिया, मोहन सिंह कुशवाह, सतीश गोस्वामी एवं शशिकांत पांडेय को शामिल किया गया है।

जलस्तर के साथ बढ़ रही लोगों की धडक़नें

प्रदेश के मालवांचल एवं राजस्थान में लगातार हो रही बरसात के चलते गांधी सागर बांध से पांच गेट खोलकर चंबल नदी में ९५ हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि सोमवार की रात तक अटेर क्षेत्र से गुजरी चंबल नदी का जलस्तर बढ़ जाएगा। यहां बता दें कि गांधी सागर बांध को 1305 फीट के जलस्तर पर ही अपने गेट खोलकर करीब 95 हजार क्यूसेक पानी छोडऩा पड़ा है। इसके बाद जवाहर सागर एवं कोटा बैराज के गेट खुलना तय हंै। लिहाजा चंबल नदी में हालात बीते साल की भांति भी निर्मित हो सकते हैं। इसको लेकर ग्रामीणों की धडक़नें जलस्तर के साथ ही बढ़ रही हैं।

तटवर्ती गांव इस बार होंगे खाली

विदित हो कि गत वर्ष प्रशासन द्वारा कई बार समझाइश के बावजूद चंबल के तटवर्ती गांव के लोगों ने घर खाली नहीं किए थे। लिहाजा जलस्तर लगातार बढ़ता रहा और करीब आधा दर्जन गांव के लोग बाढ़ में फंस गए थे। इस बार न केवल प्रशासन गांव खाली कराने को लेकर सख्त रवैया इख्तियार किए हुए है बल्कि स्वयं ग्रामीणजन भी किसी प्रकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहते। ग्रामीणों का कहना है कि वह खतरे से आगाह करने के साथ गांव खाली कर देंगे।

बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर ली हैं। तटवर्ती गांव के लोगों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

- अभिषेक चौरसिया, एसडीएम अटेर भिण्ड

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