CORONA EFFECT : 296 में से सिर्फ 25 फैक्ट्री चालू, उद्योगपति बोले- ऐसा ही रहा तो बर्बाद हो जाएगा बिजनेस, देखें VIDEO

बिना ब्याज ऋण, ईएमआई माफ करने, बिल में रियायत और विशेष पैकेज की मांग
शासन और उद्योगों के बीच समन्वय के लिए सेतु का काम कर रहा पत्रिका

By: हुसैन अली

Updated: 18 Apr 2020, 11:22 PM IST

मालनपुर. मंदी के झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि कोविड-19 की दस्तक ने मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में चालू फैक्ट्रियों की कमर तोड़ दी है। सिर्फ फूड प्रोडक्ट और दवाएं बनाने वाली फैक्ट्रियों को छोड़ दिया जाए तो शेष में पिछले २७ दिनों से उत्पादन बंद हैं। अधिकांश श्रमिक घर बैठे हैं। लॉकडाउन कितना लंबा चलेगा, इसको लेकर मैनेजमेंट से लेकर श्रमिक तक चिंता में है। ठेका मजदूर घर लौट चुके हैं। इन उद्योगों को खड़ा होने में मदद के लिए किए जाने वाले प्रयासों और अपेक्षाओं में शासन और उद्योगों के बीच समन्वय के लिए पत्रिका सेतु का काम कर रहा है।

मंदी का दौर चलने के बाद भी लॉकडाउन से पूर्व तक औद्योगिक क्षेत्र में २९६ में से २४६ चालू अवस्थ में थी। कोविड -19 की दस्तक के बाद अधिकांश बंद है। फूड प्रोडक्ट और दवाएं तैयार करने वाली २२ चालू हैं। इनमें भी 25 फीसदी श्रमिक ही काम पर आ रहे हैं। अस्थाई और ठेक ा श्रमिक पलायन कर चुके हैं। बंद फैक्ट्रियों की गोदामों पर तैयार माल भरा पड़ा है। वहीं परिवहन सेवाएं बंद होने से कच्चा माल भी खत्म हो चुका है। सरकार के डर से प्रबंधन ने मार्च माह को वेतन तो अपने कर्मचारियों को दे दिया है, लेकिन अप्रैल के वेतन को लेकर संशय की दीवार खड़ी हुई क्योंकि बैंक का ब्याज और बिजली का बिल देना ही पड़ रहा है। इसके अलावा लोकल खर्चे भी मुसीबत बने हुए हैं। शासन की गाइडलाइन के अनुसार फैक्ट्री चालू करने के लिए श्रमिकों का आवागमन नहीं होगा। उन्हें पूर्ण सुरक्षा के साथ फैक्ट्री में ही रहना होगा। समस्या यह है कि छोटी और माध्यम दर्जे की फैक्ट्रियों के पास न तो इतना स्पेस है और न ही श्रमिकों को ठहराने की व्यवस्था। लॉकडाउन के बाद भी बेरोजगारी की आहट सुनाई दे रही है।

सरकार से लगाई मदद की गुहार

  • बंद फैक्ट्रियों को चालू करने के लिए बिना ब्याज के ऋण दिलाया जाए। ईएमआई माफ की जाए।
  • पूर्व से ऋणी फै क्ट्रियों को ब्याज में राहत दी जाए। छंटनी की छूट प्रदान की जाए।
  • तीन माह का विद्युत बिल माफ किया जाए। फिक्स चार्ज लेना बंद किया जाए।
  • आगे आने वाले दिनों में विद्युत बिल में रियायत दी जाए।
  • बंद फैक्ट्रियों को चालू करने के लिए सरकार की और से विशेष पैकेज की व्यवस्था की जाए।

हमने 6 माह तक मंदी को झेला है और अब कोरोना की मार से बेहाल हैं। उत्पादन बंद है, अतिरिक्त भार निरंतर आ रहा है। विद्युत बिल, बैंक की ईएमआई माफ की जाए। बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया तो कई कंपनी घाटे के चलते बंद हो जाएंगी।
-यादवेंद्र सिंह, अध्यक्ष औद्योगिक संघ भिण्ड

हमारी शिवशक्ति टैंक एंड वैसल्स नाम से कंपनी है, फूड पैकेजिंग मटेरियल बनाते हैं। २२ मार्च से फैक्ट्री बंद है, माल गोदाम में पड़ा हुआ है। मार्च का वेतन तो दे दिया है। अप्रैल का वेतन देने पर विचार कर रहे हैं। समस्या बहुत है बैंक का ब्याज चल रहा है, विद्युत का फिक्स बिल भी अदा करना पड़ रहा है। सरकार से मदद नहीं मिली तो खड़े हो पाना मुश्किल है।
-जितेंद्र नागवानी, सचिव औद्योगिक संघ मालनपुर

हुसैन अली
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