scriptChambal Century Increase of 50000 turtles of 9 species 10 year 10101 | चंबल सेंचुरी में कछुओं के परिवार से आई खुशखबर, 10 साल में 9 प्रजाति के 50 हजार कछुओं का इजाफा | Patrika News

चंबल सेंचुरी में कछुओं के परिवार से आई खुशखबर, 10 साल में 9 प्रजाति के 50 हजार कछुओं का इजाफा

  • औसतन सालाना 6500 से 7000 अण्डे रखे जाते हैं हैचिंग के लिए
  • इनमें से 5000 कछुओं के बच्चे निकलते आ रहे सुरक्षित

भिंड

Published: January 13, 2022 05:35:29 pm

भिण्ड. चंबल सेंचुरी में एक खुशखबर आई है। यहां बीते एक दशक में अलग-अलग प्रजातियों के 50 हजार कछुओं में इजाफा देखने को मिला है। ये सुखद परिणाम चंबल सफारी में हैचरी स्थापित होने के बाद कछुओं के अण्डों को व्यवस्थित तरीके से हैचिंग के समय तक सुरक्षित माहौल में रखने के चलते मिल रहे हैं। वर्ष 2011 तक कछुओं के बमुश्किल 1200 से 1500 बच्चे अण्डों से सुरक्षित निकल पाते थे, लेकिन पिछले 10 साल से इसकी औसत बढकऱ 5000 हो गई है।
चंबल सेंचुरी में कछुओं के परिवार से आई खुशखबर, 10 साल में 9 प्रजाति के 50 हजार कछुओं का इजाफा
चंबल सेंचुरी में कछुओं के परिवार से आई खुशखबर, 10 साल में 9 प्रजाति के 50 हजार कछुओं का इजाफा
उल्लेखनीय है कि चंबल सफारी में पल रहे विभिन्न प्रजातियों के कछुओं की गणना अभी तक नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2000 तक करीब 10 लाख कछुओं का परिवार माना गया। इनमें वर्ष 2011 तक लगभग 7500 अण्डों में से औसतन 1200 बच्चे ही सुरक्षित निकल पा रहे थे। चंबल सफारी में कछुओं के संरक्षण एवं हैचिंग के लिए दो प्रकार की हैचरी स्थापित की गई एक्ससीटू एवं इनसीटू। इनके जरिए कछुओं के सालाना 7000 से 7500 अण्डों से 5000 बच्चे सुरक्षित निकलना शुरू हो गए।
भिण्ड के बरही में स्थापित है कछुओं का हैचरी सेंटर

भिण्ड के बरही के पास चंबल नदी किनारे कछुओं के अण्डों से सुरक्षित बच्चे निकालने के लिए 10 साल पूर्व हैचरी सेंटर स्थापित किया गया है। हैचरी सेंटर पर कार्यरत अधिकारी कर्मचारी चंबल की रेत में कछुओं के अण्डे तलाशकर उन्हें हैचिंग के लिए सुरक्षित करते हैं। बच्चे निकलने पर उन्हें चंबल में छोड़ दिया जाता है। इसके अलावा बरौली, बटेश्वर, उसैदघाट एवं सांकरी घाट पर भी कछुओं के अण्डों से बच्चों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है।
इन प्रजातियों के कछुए हैं संरक्षित

चंबल सेंचुरी में कुल नौ प्रजाति के कछुए संरिक्षत हैं जिनमें निल सोनियां, तिलकधारी, बटागुर, तीन प्रकार के, रेडक्रॉउन रूपटरटल, टेंट टरटल, इंडियन सोफटसेल टरटल प्रजाति प्रमुख है। चंबल में घडिय़ाल व डॉल्फिन की गणना नियमित रूप से की जा रही है लेकिन कछुओं की गणना की व्यवस्था नहीं हो पाई है। विभागीय स्तर पर इनके प्रजनन के आधार पर ही आंकड़ा जोड़ा जा रहा है।
चंबल सफारी में अलग-अलग प्रजाति के कछुओं की हैचिंग तक अण्डों को जाली लगाकर सुरक्षित करते हैं। बच्चे निकलने पर उन्हें चंबल में छोड़ा जाता है। सालाना करीब 5000 कछुओं की बढ़ोतरी हो रही है।
अमित निकम, डीएफओ चंबल सेंचुरी, मुरैना

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