भुखमरी के हालात में जीवन व्यतीत कर रहा परिवार

गरीबी रेखा कार्ड से लेकर विभिन्न दस्तावेज होने के बावजूद घर से लेकर शौचालय तक नहीं मिला

लहार. नगर के वार्ड क्रमांक 14 में 30 वर्षों से गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिता रहा परिवार भूखमरी की कगार पर पहुंच गया है, लेकिन उन्हें शासन की किसी भी योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाया है। आवास से लेकर शौचालय तक एक भी योजना उन तक नहीं पहुंच सकी है। जिसके चलते यह परिवार अभी भी मिट्टी से बनी मढ़ैया में जीवन बिता रहा है। ऐसा नहीं है कि शासन के पास उनकी जानकारी नहीं है, बल्कि उनके अति गरीबी रेखा के राशनकार्ड से लेकर अन्य दस्तावेज भी मौजूद हैं। इसके बाद भी प्रशासन की अनदेखी के चलते उन्हें बदतर स्थिति में दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ रहा है।


यहां बता दें कि वार्ड क्रमांक 14 निवासी सुखदेव राठौर पुत्र बदलू राठौर के परिवार में वह उसकी पत्नी उसके बेटे व बेटों की पत्नी सहित तीन छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। यह पूरा परिवार वर्षों पुरानी मिट्टी से बनी झुग्गी में निवासरत हैं। जो बारिश के समय आए दिन धंसक जाती है। वह लोग बारिश के बाद फिर से उसे ठीक करके अपना आशियाना तैयार कर लेते हैं, लेकिन तीन दिन पूर्व हुई तेज बारिश में वह झुग्गी पूरी तरह बह गई। जिसके बाद टीन के नीचे बची हुई थोड़ी जगह में ही पूरा परिवार जीवन बसर कर रहा है। गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश यह प्रतिवर्ष टीन के नीचे ही अपना पूरा साल गुजार देते हैं। इनकी दुर्दशा की कहानी कई बार नगर में पदस्थ अधिकारियों के सामने भी आई, लेकिन कोई अतिरिक्त मदद तो छोडि़ए शासन की योजनाओं के तहत भी इन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाया है। पूर्व में एक अधिकारी द्वारा इनका अति गरीबी का राशनकार्ड बनवा दिया गया था, लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ।


प्रधानमंत्री आवास से लेकर शौचालय तक नहीं मिला


दरअसल सुखदेव राठौर का अति गरीबी का राशनकार्ड 20 वर्ष पूर्व से बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार लोगों की अनदेखी के चलते उन्हें अब तक न तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिला है। यहा तक कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय भी नहीं बन पाया है। जिसके चलते यह परवार पिछले कई वर्ष बीत जाने के बाद भी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी प्रशासन का मुंह ताक रहा है। नगर पालिका जबकि शासन व प्रशासन की ओर से प्रत्येक व्यक्ति के लिए शौचालय व आवास मुहैया कराने के दावे किए जा रहे हैं।


सामाजिक संगठन व समाजसेवियों ने भी नहीं ली कोई सुध


सुखदेव के परिजनों ने कई सामाजिक संगठन एवं समाजसेवियों से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन कंगाली के हालात में जीवन व्यतीत कर रहे परिवार को अब तक किसी का सहारा नहीं मिल सका है, जबकि समाजसेवी संगठनों द्वारा लॉकडाउन के दौरान जिलेभर में सराहनीय कार्य किया गया, लेकिन यह परिवार उनकी पहंच से अब तक छूटा हुआ है।

महेंद्र राजोरे Desk
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