धूल फांक रही अटेर ग्राम पंचायत में हुए 1.25 करोड़ के गोलमाल की फाइल

जमीन पर काम कराए बिना कथित रूप से निर्माण दर्शाकर धनराशि आहरण किए जाने का मामला
जिला पंचायत सीईओ के जांच का आदेश हुआ हवा
तीन दिन में देनी थी जांच रिपोर्ट, तीन माह बाद भी नहीं निकला जांच का निष्कर्ष

भिण्ड. जिले के ग्राम पंचायत अटेर में सड़क, भवन, तालाब एवं पशुशेड आदि बनाए बिना ही फर्जी निर्माण दर्शाकर करीब 1.25 करोड़ रुपए का गोलमाल किए जाने के मामले की जांच 40 दिन पूर्व शुरू की गई थी। दरअसल जांच रिपोर्ट तीन दिवस में पेश की जानी थी जो तीन माह बीत जाने के बावजूद निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी जांच का आदेश देकर रिपोर्ट तलब करना ही भूल गए हैं।


अटेर ग्राम पंचायत में एक ही रोड को तीन बार निर्माण दर्शाने के अलावा पांच तालाब, तीन मिट्टी के कच्चे डैम, दो अन्य सड़कें एवं कई स्थानों पर बागवानी प्लांटेशन दर्शाकर 1.25 करोड़ से अधिक की धनराशि का गोलमाल किया गया है। इस संबंध में पत्रिका द्वारा ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों में 1.25 करोड़ का घोटाला, शीर्षक से खबर 08 जुलाई को पृष्ठ क्रमांक 07 पर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। घोटाला तथ्यों सहित उजागर होने के बाद जिला पंचायत सीईओ आईएस ठाकुर ने 10 जुलाई 2020 में कार्यपालन यंत्री ग्रामीण सेवा संभाग भिण्ड, प्रभारी परियोजना अधिकारी नरेगा भिण्ड, उपयंत्री जनपद पंचायत अटेर भिण्ड को उपरोक्त भ्रष्टाचार के मामले में बिंदुवार जांच कर तीन दिवस के अदंर जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए निर्देश दिए गए थे।


प्रशासन को ही नहीं बल्कि शासन के उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई हैं शिकायत


अटेर ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़े की शिकायत केवल जिला प्रशासन के अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि आयुक्त चंबल संभाग, आयुक्त मनरेगा भोपाल तथा मुख्य सचिव को भी की गई है। बावजूद इसके भ्रष्टाचार के मामले में शिकायकर्ता द्वारा तथ्य पेश किए जाने के बावजूद अभी तक जांच अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद करना तो दूर की बात है।


जिस फर्म के बिल भुगतान किए गए वह ग्राम पंचायत सचिव का है पिता


उल्लेखनीय है कि मां चामुंडा बिल्डिंग मटेरियल नामक फर्म के संचालक ग्राम पंचायत अटेर के सचिव रहुल शर्मा के पिता कमलेश शर्मा हैं। ग्राम पंचायत क्षेत्र में कथित रूप से निर्माण दर्शाए गए कार्यों का बिल भुगतान मां चामुण्डा बिल्डिंग मटेरियल नामक फर्म के नाम से कराए गए हैं। बता दें कि फर्जी निर्माण कार्य का भुगतान बिना संबंधित अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन किए कर दिया गया। जब भ्रष्टाचार जन साधारण की नजर में आ गया तो अब जांच के नाम पर गोलमोल घुमाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मैं जांच के लिए गया था। पानी बरस जाने के कारण लौट आया। उसके बाद जांच की जिम्मेदारी परियोजना अधिकारी पर पहुंच गई। इसलिए अभी तक जांच लंबित है।
प्रमोद तोमर, सहायक परियोजना अधिकारी मनरेगा अटेर

अभी तक रिपोर्ट नहीं दे पाने के चलते संबंधित जांच अधिकारियों से वजह भी जानी जाएगी। जानबूझकर जांच को लंबित रखना पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
आईएस ठाकुर, सीईओ जिला पंचायत भिण्ड

महेंद्र राजोरे Desk
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